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सर्वकोश
दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Durga Saptashati / Devi Mahatmyam with Commentary

महर्षि वेदव्यास / मार्कण्डेय पुराण द्वारा

DevanagariHindipublished156 पृष्ठ

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पृष्ठ 55

३१ ] श्री दुर्गा सप्तशती पारिजात सौरभ
'रात्रि-सूक्त'
नवार्ण मंत्र के जप के पश्चात् 'रात्रि-सूक्त' स्तोत्र के पाठ
का क्रम है। इसी स्तोत्र के द्वारा ब्रह्माजी ने भगवान् को योग
निद्रा से जगाया था। यह जीव न जाने कब से मोह की रात्रि
में सोया हुआ है। उसका जागरण दैवी आराधना से ही
सम्भव है। रात्रि-सूक्त में पराम्बा की की गई स्तुति अत्यन्त ही
महत्वपूर्ण है। अन्त में बहुत ही स्पष्ट कहा गया है कि तुम ही
इस जगत् की मूल शक्ति हो—
परा पराणां परमा त्वमेव परमेश्वरी ।
यच्च किञ्चद् क्वचिद् वस्तु सदसद्वाखिलात्मिके ।
तस्य सर्वस्य या शक्तिः सा त्वं किं स्तूयसे तदा ॥ रा०सू० १०-११
हे जगदम्बे ! परा एवं अपरा प्रकृति तुम ही हो, जो कुछ
भी स्थूल सूक्ष्म रूप से इन्द्रियगोचर है, तथा प्रकृति से परे तत्व
है; वह सब तुम ही हो। स्पष्टतः 'सर्वं खल्विदं ब्रह्म' की यही
घोषणा है। हमारे पुराणों की यही रीति है कि जो प्रति-
पाद्य तत्व परमात्मा है उसी को लक्ष्य रूप से दिखाया जाता है।
चाहे वह नारद-पुराण में नारद, विष्णु-पुराण में विष्णु तथा देवी-
भागवत में देवी को कहा जाय, सबका तत्व एक ही है। वही
ब्रह्म है, परमात्मा है, परा शक्ति है-यया ततमिदं सर्वम् को गीता
में 'येन सर्वमिदम् ततम्' कहा है 'मेरी ओर निहार' गीत में
इसी परमात्मा, परा शक्ति, परम तत्व की करुणामयी उपासना
करके द्रवित किया गया है। गीत की मुख्य पंक्तियाँ उद्धृत हैं—
करुणामय प्रतिपाल प्रभो, करुणा दृष्टि निहार ।
जीवन ज्योति प्रकाशक, प्रियतम मेरी ओर निहार ॥
साधन साध्य उपाय उपेय तुम मेरे हो आधार ।
अबकी बार उबार दयानिधि आयो तेरे द्वार ॥
सब तुममें तुममें सब देखूँ चिद् विलास संसार,
आत्म ब्रह्म की लखूँ एकता अनुभव का दीदार,
अबकी बार उबार दयानिधि, मेरी ओर निहार ॥
भक्ति संगीत सौरभ पृ० १०