सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

DevanagariMarathipublished1,172 पृष्ठ

पृष्ठ 292, कुल 1172 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 292

८
सातत्ययोग
अर्जुन उवाच
किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम ।
अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ॥ १ ॥
अर्जुनके सात प्रश्न --
फिर कहा अर्जुनने । जी सुनलिया मैंने ।
अब जो पूछा मैने । कहो वह ॥ १ ॥
कहो क्या है वह ब्रह्म । किसका नाम है कर्म ।
अथवा क्या है अध्यात्म । कहो मुझे ॥ २ ॥
प्रभो ! अधिभूत यह है कैसे । औ' अधिदैवत कहते किसे ।
यह सुनाओ प्रकट रूपसे । जो मैं समझूं ॥ ३ ॥
अधियज्ञः कथं कोऽत्र देहेऽस्मिन्मधुसूदन ।
प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोऽसि नियतात्मभिः ॥ २ ॥
प्रभो अधियज्ञ क्या है । इस देहमें कौन है ।
समझमें न आता है । अनुमानके भी ॥ ४ ॥
अर्जुनने कहा
किसको कहते ब्रह्म तथा अध्यात्म-कर्म क्या ।
अधिभूत कहो क्या है तथा क्या अधिदैव भी ॥ १ ॥
अधियज्ञ यहां कौन कैसा है इस देहमें ।
कैसे प्रयाणमें योगी निग्रही जानते तुझे ॥ २ ॥