धनी धर्मदास जी की शब्दावली (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर साहिब के प्रथम पट्टशिष्य)

धनी धर्मदास जी की शब्दावली (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर साहिब के प्रथम पट्टशिष्य)
Dhani Dharamdas Ji Ki Shabdavali: Belvedere Press
सन्त धनी धर्मदास जी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
DevanagariHindipublished98 पृष्ठ
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७२ मिश्रित -
सुनो साध निरगुन की महिमा, बूझै बिरला कोई ।
सरगुन फंदे सबै चलत है, सुर नर मुनि सब लोई ॥ २ ॥
निरगुन नाम निअच्छर कहिये, रहै सबन से न्यारा ।
निरगुन सरगुन जम कै फंदा, वोहि कै सकल पसारा ॥ ३ ॥
साहेब कबीर के चरन मनावो, साधुन के सिर-ताजा ।
धरमदास पर दया कीन्हा, बाँह गहे की लाजा ॥ ४ ॥
॥ शब्द १४ ॥
साहेब हमरे सहज लगी डोरी ॥ टेक ॥
यह डोरी मोहिँ सतगुरु दीन्हा,
हमहिँ अधीन अपन करि लीन्हा ॥ १ ॥
यह डोरी मोरे प्रान उबारे,
लै भवसागर पार उतारे ॥ २ ॥
यह डोरी चढ़ि जात गगन मेँ,
निसु दिन साहेब सँग रहत मगन मेँ ॥ ३ ॥
धर्मदास बिनवै कर जोरी,
काल कष्ट से तिनुका तोरी ॥ ४ ॥
॥ शब्द १५ ॥
साहेब येहि बि