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धनी धर्मदास जी की शब्दावली (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर साहिब के प्रथम पट्टशिष्य)

धनी धर्मदास जी की शब्दावली (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर साहिब के प्रथम पट्टशिष्य)

Dhani Dharamdas Ji Ki Shabdavali: Belvedere Press

सन्त धनी धर्मदास जी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished98 पृष्ठ

पृष्ठ 67, कुल 98 में से

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पृष्ठ 67

५४ बधावा
अचिंत पुरुष को मंगल, हंसा गावै हो।
कहैं कबीर धरमदास, अमर पद पावै हो॥१७॥
———
॥ बधावा ॥
॥ शब्द १ ॥
पधारो साहेब पाहुना, मोरे मन में बहुत आनंद ॥ टेक ॥
सखि का से पोताओँ अँगना, का से पोताओँ चौक ॥ १ ॥
चंदन पोताओँ अँगना, गजमोतियन पुराओँ चौक ॥ २ ॥
सखि आँगन बोओँ लायची, मोरे फलसी नागर बेल ।
पधारो साहेब पाहुना ॥ ३ ॥
ऊँची चढ़ कर जोवती, साहेब का रथ केती दूर ॥ ४ ॥
ऊँची लहर समुद्र की, तल बहै जमुना का नीर ॥ ५ ॥
भलि भई साहेब आइया, बाजत अनहद घोर ॥ ६ ॥
कनक सिंहासन बैठका, ओढ़न अंबर चीर ॥ ७ ॥
सखि भवसागर हेरिया, लह्यो सुख सागर तीर ॥ ८ ॥
धरमदास की बीनती, मोहिँ मिलियो साहेब कबीर ॥ ६ ॥
॥ शब्द २ ॥
बधावा संत सजाऊँ हो ।
जा बिधि सतगुरु मेहर करें, सोई बिधि लाऊँ हो ॥ टेक ॥
रतन पटोरा¹ डारि पाँवड़ा², सन्मुख जाऊँ हो ।
सब सखियाँ मिलि बाँटत बधाई, मंगल गाऊँ हो ॥ १ ॥
घसि घसि चंदन अँगना लिपाऊँ, चौक पुराऊँ हो ।
मेवा नरियर पान मिठाई, संजम सबै मँगाऊँ हो ॥ २ ॥
(१) कपडा । (२) क़ालीन या बढ़िया कपड़ा जो बड़े आदमियों के चलने के
लिये बिछाया जाता है ।