धनी धर्मदास जी की शब्दावली (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर साहिब के प्रथम पट्टशिष्य)

धनी धर्मदास जी की शब्दावली (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर साहिब के प्रथम पट्टशिष्य)
Dhani Dharamdas Ji Ki Shabdavali: Belvedere Press
सन्त धनी धर्मदास जी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
DevanagariHindipublished98 पृष्ठ
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तिरबेनी से नीर मँगावो,
अलख बृच्छ कै डार हो ।
सत्त सुकृत कै कलस धराबो,
पूजो पाँव हमार हो ॥ ४ ॥
तिरगुन सेँदुरा मँगावो मोरे बाबा,
पिय से माँग भराइ हो ।
सतगुरु बिप्र के चरन पखारो,
जुग जुग रहै सोहाग हो ॥ ५ ॥
सब्द सुरत से गाँठ जुरावो,
माँड़ो राखो छाइ हो ।
पाँच भँवरिया घुमावो मोरे बाबा,
गँठिया देवो निबुकाइ हो ॥ ६ ॥
चाँद सुरज दोउ कोहबर बाबा,
पाँजी¹ दसो दुवार हो ।
ऊँच दुवारी निहारो सखियाँ,
निहुरि कै घर को जाहु हो ॥ ७ ॥
ज्ञान कै डोलिया फँदावो मोरे बाबा,
करि देवो बिदा हमार हो ।
धरमदास से छूटल सब सागर,
सब सौँ भेंटि अकवार हो ॥ ८ ॥
॥ शब्द १९ ॥
चलो सखि देखन चलिये, दुलह कबीर हैं ।
उन सौँ जुरल सनेह, जठर सौँ राखिहैं ॥ टेक ॥
(१) रास्ता ।