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धनी धर्मदास जी की शब्दावली (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर साहिब के प्रथम पट्टशिष्य)

धनी धर्मदास जी की शब्दावली (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर साहिब के प्रथम पट्टशिष्य)

Dhani Dharamdas Ji Ki Shabdavali: Belvedere Press

सन्त धनी धर्मदास जी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished98 पृष्ठ

पृष्ठ 61, कुल 98 में से

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पृष्ठ 61

हो ॥ १ ॥
Line 4: घटहि में मानसरोवर, घाट बँधावो हो ।
Line 5: घटहि में पाँच कहार, दूलह नहवावहिँ हो ॥ २ ॥
Line 6: घटहि में नेह नउनिया, तो चरन पखारहिँ हो ।
Line 7: प्रेम प्रीत के ललना, तो पलना झुलावहिँ हो ॥ ३ ॥
Line 8: घटहि में दया के दरजी, तो दरज मिलावहिँ हो ।
Line 9: पाँच तत्त के जामा, दुलह पहिरावहिँ हो ॥ ४ ॥
Line 10: घटहि में लोह लोहार, तो कँगना डावहिँ१ हो ।
Line 11: तीन गुनन के सेहरा, दुलह पहिरावहिँ हो ॥ ५ ॥
Line 12: घटहि में चंदन चौक, तो चौक पुरावहिँ हो ।
Line 13: सत्त सुकृत को कलसा, तहाँ धरावहिँ हो ॥ ६ ॥
Line 14: घटहि में मन सत माली, तो मौर ले आवहि हो ।
Line 15: घटहि में जुगति कै जौहरि, जोत पहिरावहि हो ॥ ७ ॥
Line 16: घटहि सोहंगम नारि, तो पिय को रिझावहि हो ।
Line 17: बार बार गुरु झगरि, तो अरज सुनावहि हो ॥ ८ ॥
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