दशरूपक (आचार्य धनञ्जय - धनिक प्रणीत अवलोक टीका एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

दशरूपक (आचार्य धनञ्जय - धनिक प्रणीत अवलोक टीका एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)
Dasarupaka of Dhananjaya with Avaloka Commentary
आचार्य धनञ्जय (टीकाकार: धनिक / डॉ. भोलाशंकर व्यास) द्वारा
DevanagariHindipublished168 पृष्ठ
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न्यासविक्रान्तपत्तौ । Wait, look atपदन्यास: Is it पदन्यास? Let's read: प-द-न्या-स. Yes, पदन्यास`.
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Line 8 (L9):
स्फीतासृक्पानगोष्ठीरसदशिवशिवातूर्यनृत्यत्कवन्धे
स्फी-ता-सृ-क्-पा-न-गो-ष्ठी-र-स-द-शि-व-शि-वा-तू-र्य-नृ-त्य-त्-क-व-न्धे
Wait:रसदशिवशिवा?
Veṇīsaṃhāra 1.27:
स्फीतासृक्पानगोष्ठीरसदशिवशिवातूर्यनृत्यत्कबन्धे(orत्कवन्धे).
Here it'sत्कवन्धे(व). -
Line 9 (L10):
संग्रामैकार्णवान्तःपयसि विचरितुं पण्डिताः पाण्डुपुत्राः ॥'
Notice the single quote at the end:॥' -
Line 10 (L11):
`इत्यनेन विषण्णाया द्रौपद्याः क्रोधोत्साहबीजानुगुण्येनैव प्रोत्साहनाद्भेद इति ॥