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सर्वकोश
दशरूपक (आचार्य धनञ्जय - धनिक प्रणीत अवलोक टीका एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

दशरूपक (आचार्य धनञ्जय - धनिक प्रणीत अवलोक टीका एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Dasarupaka of Dhananjaya with Avaloka Commentary

आचार्य धनञ्जय (टीकाकार: धनिक / डॉ. भोलाशंकर व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished168 पृष्ठ

पृष्ठ 22, कुल 168 में से

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पृष्ठ 22

न्यासविक्रान्तपत्तौ । Wait, look atपदन्यास: Is it पदन्यास? Let's read: प-द-न्या-स. Yes, पदन्यास`.

  • Line 8 (L9):
    स्फीतासृक्पानगोष्ठीरसदशिवशिवातूर्यनृत्यत्कवन्धे
    स्फी-ता-सृ-क्-पा-न-गो-ष्ठी-र-स-द-शि-व-शि-वा-तू-र्य-नृ-त्य-त्-क-व-न्धे
    Wait: रसदशिवशिवा?
    Veṇīsaṃhāra 1.27:
    स्फीतासृक्पानगोष्ठीरसदशिवशिवातूर्यनृत्यत्कबन्धे (or त्कवन्धे).
    Here it's त्कवन्धे (व).

  • Line 9 (L10):
    संग्रामैकार्णवान्तःपयसि विचरितुं पण्डिताः पाण्डुपुत्राः ॥'
    Notice the single quote at the end: ॥'

  • Line 10 (L11):
    `इत्यनेन विषण्णाया द्रौपद्याः क्रोधोत्साहबीजानुगुण्येनैव प्रोत्साहनाद्भेद इति ॥