सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
परिशिष्ट
श्री दादूवाणी जी की आरती
ॐ जय दादूदयालु गिरा, मां जय दादूदयालु गिरा ।
माधव के मन भावनी, भव भय सततः हरा ॥ 1 ॥
जो गावे, सुख पावे, क्लेश मिटै हिय का ।
शम दमादि मन आवे, क्षौभ मिटे जिय का ॥ 2 ॥
काम क्रोध मद भंजनि, लोभ मोह हननी ।
साधक जन मन रंजनी, शांति क्षमा जननी ॥ 3 ॥
संशय शोक नशावनी, कहती हरि गाथा ।
श्रुति सिद्धांत सुनावति,तारति भव पाथा ॥ 4 ॥
भेद विवाद मिटावनि, समता सुखकारी ।
पक्ष विपक्ष नशावनि, विषयाशाहारी ॥ 5 ॥
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श्री दादूवाणी-उपदेश अष्टक
अखिल विकार विभंजति, मंजति मन नीका ।
निगमागम नवनीत सौं, गिर प्राकृत टीका ॥ 6 ॥
बम्ह विचार प्रदायिनी, पर वैराग्य प्रदा ।
सफल करत नर तन को, सोचत सरति सदा ॥ 7 ॥
धारण करत बुद्धि को, बम्हनिष्ठ करती ।
नारायण निश्चय ही, मुक्ति महल धरती ॥ 8 ॥
उपदेश अष्टक
दादू सद्गुरु शीश पर, उरमें जिनको नांव ।
सुन्दर आये शरण तकि, जिन पायो निज धाम ॥
बहे जात संसार में, सद्गुरु पकरें केश ।
सुन्दर काढें डूबते, दे अद्भुत उपदेश ॥
उपदेश श्रवण सुनाय अद्भुत, हृदय ज्ञान प्रकाशियो ।
चिरकाल को अज्ञान पूरण, सकल भ्रम तम नाशियो ॥
आनन्ददायक पुनि सहायक, करत जन निष्काम हैं ।
दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ 1 ॥
सुन्दर सद्गुरु हाथ में, करडी लई कमान ।
मार्यो खैंच कसीस कर, बचन लगाया बाण ॥
जिनि बचन बाण लगाय उर में, मृतक फेर जिवाइया ।
मुख द्वार होय उचार कर, निज सार अमृत पाइया ॥
अत्यन्त कर आनन्द में, हम रहत आठों याम हैं ।
दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ 2 ॥
सुन्दर सद्गुरु जगत में, पर उपकारी होय ।
नीच ऊंच सब ऊबरैं, शरणे आवै कोय ॥
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श्री दादूवाणी-उपदेश अष्टक
जो आय शरण होय प्रापति, ताप तिन तन के हरें ।
पुनि फेरि बदले घाट उनको, जीव थैं ब्रह्म ही करें ॥
कछू ऊंच नीच न द्रिष्टि जिनके, सकल को विश्राम हैं ।
दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ ३ ॥
सुन्दर सद्गुरु सहज में, कीये पैली पार ।
और उपाय न तिर सके, भव सागर संसार ॥
संसार सागर महा दूस्तर, ताहि कहि अब को तिरे ।
जे कोटि साधन करे कोउ, वृथा ही पच पच मरें ॥
जिनि बिना परिश्रम पार कीये, प्रकट सुख के धाम हैं ।
दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ ४ ॥
सुन्दर सद्गुरु यों कहें, याही निश्चय आनि ।
जो कुछ सुनिये देखिये, सर्व स्वप्न कर जानि ॥
जिनि स्वप्न तुल्य दिखाय दीयो, स्वर्ग नर्क उभय कहैं ।
सुख दुख हर्ष विषाद पुनि, मान अपमान सम गहैं ॥
जिनि जाति कुल अरु वर्ण आश्रम, कहत मिथ्या नाम हैं ।
दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ ५ ॥
सुन्दर सद्गुरु यों कहें, सत्य कछु नहिं रंच ।
मिथ्या माया विस्तरी, जे कछु सकल प्रपंच ॥
उपज्यो प्रपंच अनादिको, यह महामाया विस्तरी ।
नानात्व ह्रै करि जगत भास्यो, बुद्धि सबहिन की हरी ॥
जिनि भ्रम मिटाय दिखाय दीयो, सर्व व्यापक राम हैं ।
दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ ६ ॥
सुन्दर सद्गुरु यों कहें, भ्रम ते भासे और ।
सीपि मांहि रूपौ द्रसे, सर्प रज्जु की ठौर ॥
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श्री दादूवाणी-श्री जैमल जी का रामरक्षा मंत्र
रज्जु मांहि जैसे सर्प भासे,सीपी में रूपौ यथा ।
मृग तृष्णा का जल बुद्धि देखे, विश्व मिथ्या है तथा ॥
जिनि लह्यो ब्रह्म अखंड पद, अद्वैत सब ही ठाम हैं ।
दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ 7 ॥
सुन्दर सद्गुरु यों कहें, मुक्त सहज ही होय ।
या अष्टक तैं भ्रम मिटे, नित्य पढे जे कोय ॥
जो पढे नित्य प्रति ज्ञान अष्टक, मुक्त होय सु सहज ही ।
संशय न कोउ रहे ताके, दास सुन्दर यों कही ॥
जिनि ह्वै कृपालु अनेक तारे, सकल विधि उद्दाम हैं ।
दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ 8 ॥
सुन्दर अष्टक सब सरस, तुम जिनि जानऊ आन ।
अष्टक याही कहे सुने, ताके उपजे ज्ञान ॥
परमेश्वर और परम गुरु, दोऊ एक समान ।
सुन्दर क हत विशेष यह, गुरु थैं पावे ज्ञान ॥
दादू सद्गुरु के चरण, वंदत सुन्दरदास ।
जिनकी महिमा कहत हैं, जिनते ज्ञान प्रकाश ॥
श्री जैमल जी का रामरक्षा-मंत्र
ॐ राम बिना इस जीव को, कोइ न राखणहार ।
जैमल सतगुरु आपणा, राखे बारम्बार ॥ 1 ॥
ॐ आकाशे-रक्षा करै, पातालै -प्रतिपाल ।
घट माँही रक्षा करै, जैमल दीनदयाल ॥ 2 ॥
शीश रक्षा-सांई करै, श्रवणों सिरजनहार ।
नैन-रक्षा नरहरि करै, नासा अपरम्पार ॥ 3 ॥
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श्री दादूवाणी-श्री जैमल जी का रामरक्षा मंत्र
मुख रक्षा माधो करे, कंठ रक्षा करतार ।
हृदय रक्षा हरि करे, भुज रक्षा भव तार ॥ 4 ॥
पेट रक्षा पुरषोत्तमा, नाभी त्रिभुवन सार ।
जंघ रक्षा जगदीशजी, पिण्डी परम उदार ॥ 5 ॥
गिर रक्षा गोविन्द करै, पगथली प्राणअधार ।
जहां-तहां रक्षा करैं, सांचा सिरजनहार ॥ 6 ॥
आगै राखै रामजी, पीछे राखणहार ।
बायें दाहिन राखिले, कर गहि तूं करतार ॥ 7 ॥
जम डंका लागे नहीं, विघ्न-काल भय दूर ।
राम रक्षा जिन की करैं, बाजें अनहद तूर ॥ 8 ॥
भेजी राखै भूधरा, जिह्वा को जगदीश ।
कलेजा राखै केशवा, अस्थि राखै सब ईश ॥ 9 ॥
मींजी राखै माधवा, मन को मोहन राय ।
मनसा की रक्षा करै, कबहुँ दूरि न जाय ॥ 10 ॥
आत्मा को अकला राखे, जीव को जोति सरूप ।
सुरति को राखै साइयां, चित को अमर अनूप ॥ 11 ॥
दिन को राखै रामजी, सूतां राम सहाय ।
सुपनां ही में संग रहै, जैमल एकै भाय ॥ 12 ॥
सर्प सिंह व्यापैं नहीं, डायन नजर मशाण ।
अंत काल रक्षा करै, काल न झंपै प्राण ॥ 13 ॥
राख राख शरणागता, हमको अबकी बार ।
जैमल की रक्षा करो, साचा सिरजनहार ॥ 14 ॥
हरिजी तुम बिन को नहीं, हमको राखणहार ।
यह जैमल की बीनती, सुनियो बारंबार ॥ 15 ॥
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श्री दादूवाणी-श्री जैमल जी का रामरक्षा मंत्र
जीव हमारा एक है, बैरी लाख अनंत ।
इनसे हमको राखिये, श्रीजयमल गुरु भगवन्त ॥ 16 ॥
बस्ती में रक्षा करें, अरु बन में प्रतिपाल ।
घट मांहि रक्षा करें, श्री स्वामी दीनदयाल ॥ 17 ॥
दिन को राखे चन्द्रमाँ, रात को राखे सूर ।
पूर्णब्रह्म रक्षा करे, बाजे अनहद तूर ॥ 18 ॥
बोलो श्री स्वामी दादूदयालजी महाराज की जय
निरंजन देव की जय
सत्यराम
दादूराम
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