सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
पृष्ठ 503, कुल 504 में से
संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-श्री जैमल जी का रामरक्षा मंत्र
मुख रक्षा माधो करे, कंठ रक्षा करतार ।
हृदय रक्षा हरि करे, भुज रक्षा भव तार ॥ 4 ॥
पेट रक्षा पुरषोत्तमा, नाभी त्रिभुवन सार ।
जंघ रक्षा जगदीशजी, पिण्डी परम उदार ॥ 5 ॥
गिर रक्षा गोविन्द करै, पगथली प्राणअधार ।
जहां-तहां रक्षा करैं, सांचा सिरजनहार ॥ 6 ॥
आगै राखै रामजी, पीछे राखणहार ।
बायें दाहिन राखिले, कर गहि तूं करतार ॥ 7 ॥
जम डंका लागे नहीं, विघ्न-काल भय दूर ।
राम रक्षा जिन की करैं, बाजें अनहद तूर ॥ 8 ॥
भेजी राखै भूधरा, जिह्वा को जगदीश ।
कलेजा राखै केशवा, अस्थि राखै सब ईश ॥ 9 ॥
मींजी राखै माधवा, मन को मोहन राय ।
मनसा की रक्षा करै, कबहुँ दूरि न जाय ॥ 10 ॥
आत्मा को अकला राखे, जीव को जोति सरूप ।
सुरति को राखै साइयां, चित को अमर अनूप ॥ 11 ॥
दिन को राखै रामजी, सूतां राम सहाय ।
सुपनां ही में संग रहै, जैमल एकै भाय ॥ 12 ॥
सर्प सिंह व्यापैं नहीं, डायन नजर मशाण ।
अंत काल रक्षा करै, काल न झंपै प्राण ॥ 13 ॥
राख राख शरणागता, हमको अबकी बार ।
जैमल की रक्षा करो, साचा सिरजनहार ॥ 14 ॥
हरिजी तुम बिन को नहीं, हमको राखणहार ।
यह जैमल की बीनती, सुनियो बारंबार ॥ 15 ॥
- 503 -