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सर्वकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-उपदेश अष्टक
जो आय शरण होय प्रापति, ताप तिन तन के हरें ।
पुनि फेरि बदले घाट उनको, जीव थैं ब्रह्म ही करें ॥
कछू ऊंच नीच न द्रिष्टि जिनके, सकल को विश्राम हैं ।
दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ ३ ॥
सुन्दर सद्गुरु सहज में, कीये पैली पार ।
और उपाय न तिर सके, भव सागर संसार ॥
संसार सागर महा दूस्तर, ताहि कहि अब को तिरे ।
जे कोटि साधन करे कोउ, वृथा ही पच पच मरें ॥
जिनि बिना परिश्रम पार कीये, प्रकट सुख के धाम हैं ।
दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ ४ ॥
सुन्दर सद्गुरु यों कहें, याही निश्चय आनि ।
जो कुछ सुनिये देखिये, सर्व स्वप्न कर जानि ॥
जिनि स्वप्न तुल्य दिखाय दीयो, स्वर्ग नर्क उभय कहैं ।
सुख दुख हर्ष विषाद पुनि, मान अपमान सम गहैं ॥
जिनि जाति कुल अरु वर्ण आश्रम, कहत मिथ्या नाम हैं ।
दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ ५ ॥
सुन्दर सद्गुरु यों कहें, सत्य कछु नहिं रंच ।
मिथ्या माया विस्तरी, जे कछु सकल प्रपंच ॥
उपज्यो प्रपंच अनादिको, यह महामाया विस्तरी ।
नानात्व ह्रै करि जगत भास्यो, बुद्धि सबहिन की हरी ॥
जिनि भ्रम मिटाय दिखाय दीयो, सर्व व्यापक राम हैं ।
दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ ६ ॥
सुन्दर सद्गुरु यों कहें, भ्रम ते भासे और ।
सीपि मांहि रूपौ द्रसे, सर्प रज्जु की ठौर ॥

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