सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-श्री जैमल जी का रामरक्षा मंत्र
रज्जु मांहि जैसे सर्प भासे,सीपी में रूपौ यथा ।
मृग तृष्णा का जल बुद्धि देखे, विश्व मिथ्या है तथा ॥
जिनि लह्यो ब्रह्म अखंड पद, अद्वैत सब ही ठाम हैं ।
दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ 7 ॥
सुन्दर सद्गुरु यों कहें, मुक्त सहज ही होय ।
या अष्टक तैं भ्रम मिटे, नित्य पढे जे कोय ॥
जो पढे नित्य प्रति ज्ञान अष्टक, मुक्त होय सु सहज ही ।
संशय न कोउ रहे ताके, दास सुन्दर यों कही ॥
जिनि ह्वै कृपालु अनेक तारे, सकल विधि उद्दाम हैं ।
दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ 8 ॥
सुन्दर अष्टक सब सरस, तुम जिनि जानऊ आन ।
अष्टक याही कहे सुने, ताके उपजे ज्ञान ॥
परमेश्वर और परम गुरु, दोऊ एक समान ।
सुन्दर क हत विशेष यह, गुरु थैं पावे ज्ञान ॥
दादू सद्गुरु के चरण, वंदत सुन्दरदास ।
जिनकी महिमा कहत हैं, जिनते ज्ञान प्रकाश ॥
श्री जैमल जी का रामरक्षा-मंत्र
ॐ राम बिना इस जीव को, कोइ न राखणहार ।
जैमल सतगुरु आपणा, राखे बारम्बार ॥ 1 ॥
ॐ आकाशे-रक्षा करै, पातालै -प्रतिपाल ।
घट माँही रक्षा करै, जैमल दीनदयाल ॥ 2 ॥
शीश रक्षा-सांई करै, श्रवणों सिरजनहार ।
नैन-रक्षा नरहरि करै, नासा अपरम्पार ॥ 3 ॥
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