सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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राग सोरठ
अथ राग सोरठ 19
(गायन समय रात्रि 9 से 12)
298. स्मरण । उत्सव ताल
कोली साल न छाड़ै रे, सब घावर काढै रे ।। टेक ।।
प्रेम पाण लगाई धागै, तत्त्व तेल निज दीया ।
एक मना इस आरंभ लागा, ज्ञान राछ भर लीया ।। 1 ।।
नाँव नली भर बुणकर लागा, अंतरगति रंग राता ।
ताणैं बाणें जीव जुलाहा, परम तत्व सौं माता ।। 2 ।।
सकल शिरोमणि बुनैन विचारा, सान्हाँ सूत न तोड़ै ।
सदा सचेत रहै ल्यौ लागा, ज्यौं टूटै त्यौं जोड़ै ।। 3 ।।
ऐसे तनि बुनि गहर गजीना, सांई के मन भावै ।
दादू कोली करता के संग, बहुरि न इहि जग आवै ।। 4 ।।
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