सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग नट नारायण 18
नामदेव कबीर जुलाहो, जन रैदास तिरै ।
दादू बेगि बार नहीं लागै, हरि सौं सबै सरै ॥ ३ ॥
२१६. मंगलाचरण । राज विद्याधर ताल
नमो नमो हरि ! नमो नमो ।
ताहि गुसाँई नमो नमो, अकल निरंजन नमो नमो ।
सकल वियापी जिहिं जग कीन्हा, नारायण निज नमो नमो ॥ टेक ॥
जिन सिरजे जल शीश चरण कर, अविगत जीव दियो ।
श्रवण सँवारि नैन रसना मुख, ऐसो चित्र कियो ॥ १ ॥
आप उपाइ किये जगजीवन, सुर नर शंकर साजे ।
पीर पैगम्बर सिद्ध अरु साधक, अपने नाम निवाजे ॥ २ ॥
धरती अम्बर चंद सूर जिन, पाणी पवन किये ।
भाणण घडन पलक में केते, सकल सँवार लिये ॥ ३ ॥
आप अखंडित खंडित नाहीं, सब सम पूर रहे ।
दादू दीन ताहि नइ वंदित, अगम अगाध कहे ॥ ४ ॥
२१७. हैरान । उत्सव ताल
हम तैं दूर रही गति तेरी ।
तुम हो तैसे तुम हीं जानो, कहा बपुरी मति मेरी ॥ टेक ॥
मन तैं अगम दृष्टि अगोचर, मनसा की गम नाँहीं ।
सुरति समाइ बुद्धि बल थाके, वचन न पहुँचे तांहीं ॥ १ ॥
जोग न ध्यान ज्ञान गम नांही, समझ समझ सब हारे ।
उनमनी रहत प्राण घट साधे, पार न गहत तुम्हारे ॥ २ ॥
खोज परे गति जाइ न जानी, अगह गहन कैसे आवे ।
दादू अविगत देहु दया कर, भाग बड़े सो पावे ॥ ३ ॥
इति राग नट नारायण सम्पूर्ण: ॥ १८ ॥ पद ७ ॥
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