सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-दया निर्वैरता का अंग 29
दादू मंदिर काँच का, मर्कट सुनहाँ जाइ ।
दादू एक अनेक है, आप आपको खाइ ॥ 17 ॥
आत्म भाई जीव सब, एक पेट परिवार ।
दादू मूल विचारिये, तो दूजा कौन गँवार ॥ 18 ॥
दादू सूखा सहजैं कीजिये, नीला भानै नांहि ।
काहे को दुख दीजिये, साहिब है सब मांहि ॥ 19 ॥
दया निर्वैरता
घट घट के उनहार सब, प्राण परस है जाइ ।
दादू एक अनेक है, बरतैं नाना भाइ ॥ 20 ॥
आये एकंकार सब, साँई दिये पठाइ ।
दादू न्यारे नांम धर, भिन्न भिन्न है जाइ ॥ 21 ॥
आये एकंकार सब, साँई दिये पठाइ ।
आदि अंत सब एक है, दादू सहज समाइ ॥ 22 ॥
आतम देव आराजिये, विरोधिये नहिं कोइ ।
आराधे सुख पाइये, विरोधे दुःख होइ ॥ 23 ॥
ज्यों आपै देखे आपको, यों जे दूसर होइ ।
तो दादू दूसर नहीं, दुःख न पावै कोइ ॥ 24 ॥
दादू सम कर देखिये, कुंजर कीट समान ।
दादू दुविधा दूर कर, तज आपा अभिमान ॥ 25 ॥
अदया हिंसा
दादू अर्श खुदाय का, अजरावर का थान ।
दादू सो क्यों ढाहिये, साहिब का नीशान ॥ 26 ॥
दादू आप चिणावै देहुरा, तिसका करहि जतन ।
प्रत्यक्ष परमेश्वर किया, सो भानै जीव रतन ॥ 27 ॥
मसीत संवारी माणसाँ, तिसको करैं सलाम ।
ऐन आप पैदा किया, सो ढाहैं मुसलमान ॥ 28 ॥
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