सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-दया निर्वैरता का अंग 29
दादू जंगल मांही जीव जे, जग तैं रहैं उदास।
भयभीत भयानक रात दिन, निश्चल नाहीं वास ॥ 29 ॥
वाचा बंधी जीव सब, भोजन पानी घास।
आत्म ज्ञान न ऊपजै, दादू करहि विनास ॥ 30 ॥
काला मुँह कर करद का, दिल तैं दूर निवार।
सब सूरत सुबहान की, मुल्लां मुग्ध न मार ॥ 31 ॥
गला गुस्से का काटिये, मियाँ मनी को मार।
पंचों बिस्मिल कीजिये, ये सब जीव उबार ॥ 32 ॥
वैर विरोधे आत्मा, दया नहीं दिल मांहि।
दादू मूरति राम की, ताको मारन जांहि ॥ 33 ॥
दया निर्वैरता
कुल आलम यके दीदम, अरवाहे इखलास।
बद अमल बदकार दुई, पाक यारां पास ॥ 34 ॥
काल झाल तैं काढ कर, आतम अंग लगाइ।
जीव दया यहु पालिये, दादू अमृत खाइ ॥ 35 ॥
दादू बुरा न बांछै जीव का, सदा सजीवन सोइ।
परलै विषय विकार सब, भाव भक्ति रत होइ ॥ 36 ॥
सतगुरु संतों की यह रीत, आत्म भाव सौं राखैं प्रीत।
ना को बैरी ना को मीत, दादू राम मिलन की चीत ॥ 37 ॥
इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्तियोगनाम
तत्वसारमत-सर्वसाधुर्बुद्धिज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा
धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं
मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य
उन्तीसवां दया निर्वैरता काअंग सम्पूर्ण ॥ अंग 29 ॥ साखी 37 ॥
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