सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-दया निर्वैरता का अंग 29
निर्वैरी सब जीव सौं, संतजन सोई ।
दादू एकै आत्मा, बैरी नहिं कोई ॥ 4 ॥
सब हम देख्या शोध कर, दूजा नांही आन ।
सब घट एकै आत्मा, क्या हिन्दू मुसलमान ॥ 5 ॥
दादू नारी पुरुष का नाम धर, इहि संशय भ्रम भुलान ।
सब घट एकै आत्मा, क्या हिंदू मुसलमान ॥ 6 ॥
दादू दोनों भाई हाथ पग, दोनों भाई कान ।
दोनों भाई नैन हैं, हिंदू मुसलमान ॥ 7 ॥
दादू संशय आरसी, देखत दूजा होइ ।
भ्रम गया दुविधा मिटी, तब दूसर नाहिं कोइ ॥ 8 ॥
किस सौं बैरी ह्वै रह्या, दूजा कोई नांहि ।
जिसके अंग तैं ऊपजै, सोई है सब मांहि ॥ 9 ॥
सब घट एकै आत्मा, जानै सो नीका ।
आपा पर में चीन्ह ले, दर्शन है पीव का ॥ 10 ॥
काहे को दुख दीजिये, घट घट आत्माराम ।
दादू सब संतोषिये, यह साधु का काम ॥ 11 ॥
काहे को दुख दीजिये, साँई है सब मांहि ।
दादू एकै आत्मा, दूजा कोई नांहि ॥ 12 ॥
साहिब जी की आत्मा, दीजे सुख संतोंष ।
दादू दूजा को नहीं, चौदह तीनों लोक ॥ 13 ॥
दादू जब प्राण पिछाणै आपको, आत्म सब भाई ।
सिरजनहारा सबनि का, तासौं ल्यौ लाई ॥ 14 ॥
आत्माराम विचार कर, घट घट देव दयाल ।
दादू सब संतोषिये, सब जीवों प्रतिपाल ॥ 15 ॥
दादू पूरण ब्रह्म विचारले, द्वैत भाव कर दूर ।
सब घट साहिब देखिये, राम रह्या भरपूर ॥ 16 ॥
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