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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 190, कुल 504 में से

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श्री दादूवाणी-साधु का अंग 15
साधु पारिख लक्षण
साधु शिरोमणि शोध ले, नदी पूर पर आइ।
संजीवनि साम्हा चढै, दूजा बहिया जाइ ॥ 58 ॥
जिनके मस्तक मणि बसै, सो सकल शिरोमणि अंग।
जिनके मस्तक मणि नहीं, ते विष भरे भुवंग ॥ 59 ॥
साधु महिमा
दादू इस संसार में, ये द्वै रत्न अमोल।
इक सांई अरु संतजन, इनका मोल न तोल ॥ 60 ॥
दादू इस संसार में, ये द्वै रहै लुकाइ।
राम स्नेही संतजन, और बहुतेरा आइ ॥ 61 ॥
सगे हमारे साधु हैं, सिर पर सिरजनहार।
दादू सतगुरु सो सगा, दूजा धंध विकार ॥ 62 ॥
साधु पारख लक्षण
जिनके हिरदै हरि बसै, सदा निरंजन नांऊँ।
दादू साचे साध की, मैं बलिहारी जांऊँ ॥ 63 ॥
साचा साधु दयालु घट, साहिब का प्यारा।
राता माता राम रस, सो प्राण हमारा ॥ 64 ॥
सज्जन दुर्जन
दादू फिरता चाक कुम्हार का, यों दीसे संसार।
साधुजन निहचल भये, जिनके राम अधार ॥ 65 ॥
सत्संग महिमा
जलती बलती आतमा, साधु सरोवर जाइ।
दादू पीवै राम रस, सुख में रहै समाइ ॥ 66 ॥
कृत्तम कर्त्ता
कांजी मांहीं भेल कर, पीवै सब संसार।
कर्त्ता केवल निर्मला, को साधु पीवणहार ॥ 67 ॥

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