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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 189, कुल 504 में से

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पृष्ठ 189

श्री दादूवाणी-साधु का अंग 15
साधु पारिख लक्षण
जे जन हरि के रंग रंगे, सो रंग कदे न जाइ।
सदा सुरंगे संत जन, रंग में रहे समाइ ॥ 47 ॥
दादू राता राम का, अविनाशी रंग मांहि।
सब जग धोबी धो मरै, तो भी खूटै नांहि ॥ 48 ॥
साहिब किया सो क्यों मिटै, सुन्दर शोभा रंग।
दादू धोवैं बावरे, दिन दिन होइ सुरंग ॥ 49 ॥
साधु परमार्थी
परमारथ को सब किया, आप स्वार्थ नांहि।
परमेश्वर परमार्थी, कै साधु कलि मांहि ॥ 50 ॥
पर उपकारी संत सब, आये इहि क लि मांहि।
पीवैं पिलावैं राम रस, आप सवारथ नांहि ॥ 51 ॥
पर उपकारी संत जन, साहिब जी तेरे ।
जाती देखी आतमा, राम कहि टेरे ॥ 52 ॥
चंद सूर पावक पवन, पाणी का मत सार।
धरती अंबर रात दिन, तरुवर फलैं अपार ॥ 53 ॥
छाजन भोजन परमार्थी, आतम देव आधार।
साधु सेवक राम के, दादू पर उपकार ॥ 54 ॥
साधु साक्षीभूत
जिसका तिसको दीजिये, सुकृत पर उपकार।
दादू सेवक सो भला, सिर नहिं लेवे भार ॥ 55 ॥
परमार्थ को राखिये, कीजे पर उपकार।
दादू सेवक सो भला, निरंजन निराकार ॥ 56 ॥
सेवा सुकृत सब गया, मैं मेरा मन मांहि।
दादू आपा जब लगै, साहिब मानै नांहि ॥ 57 ॥

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