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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

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पृष्ठ 71

68 चन्द्रशेखर आजाद
और सतर्कता का वर्णन किया कि अभी हमें इस विचार को छोड़ना पड़ेगा,
इस समाचार ने भगतसिंह के सारे ख्वाब तोड़ दिए। बहुत कोशिशों के
बाद बिस्मिल की लिखी एक गजल हाथ लगी।" ...
' बिस्मिल काकोरी काण्ड के नेता थे, अतः फाँसी की सजा सुना दिये जाने
के बाद भी उन पर पुलिस का पहरा सबसे अधिक कठोर था। उनके द्वारा
बाहर भेजी जानेवाली तथा उनके पास आनेवाली चीजो पर कड़ी निग-
रानी रखी जाती थी; उनके द्वारा लिखी गई इस गजल को शायद जेल के
अधिकारियों ने एक साधारण गजल समझ लिया था; इसमें छिपे गूढ़ '
को वे नहीं समझ पाए थे। यह गजल निम्नलिखित है—
मिट गया जब मिटने वाला
फिर सलाम आया तो क्या।
दिल की बरबादी के बाद
उनका पयाम आया तो क्या॥
मिट गई सारी उम्मीदें
मिट गए सारे खयाल।
उस घड़ी गर नामबर
लेकर पयाम आया तो क्या॥
ऐ दिले नादान मिट जा
अब तू कूचे यार में।
फिर मेरी नाकामियों के
बाद काम आया तो क्या॥
काश अपनी जिन्दगी में
हम वो मंजर देखते।
बरसरे तुरबत कोई
महशर खराम आया तो क्या॥