अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
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संदर्भ में पढ़ेंतृतीय अध्याय
साध्य और साधना
प्रारम्भ में क्रान्ति शब्द का अर्थ ही हिंसा के माध्यम से सत्ता-परिवर्तन
करना था, भले ही आज क्रान्ति शब्द अन्य अर्थों में भी प्रयुक्त होने लगा है,
जैसे हरित क्रान्ति अथवा औद्योगिक क्रान्ति इत्यादि। अतः क्रान्ति पथ के
पथिकों के लिए अपना साध्य देश को स्वतन्त्र कराना ही सर्वोपरि था।
इसमें साधनों की पवित्रता पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता था। भारत
ही नहीं आयरलैण्ड एवं सोवियत संघ के क्रान्तिकारियों ने भी अपने साध्य
के लिए हिंसक साधनों को अपनाया था। इन क्रान्तिकारियों के पास आय
के कोई साधन तो थे नहीं, अपने लक्ष्य पर आगे बढ़ने के लिए इन्हें धन की
आवश्यकता पड़ती थी, जिसके लिए चन्दा माँगने पर भी धन का अभाव
अथवा कमी बनी रहती थी, अतः विवशता के कारण इन्हें डाके भी डालने
पड़ते थे।
बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ से ही बंगाल के क्रान्तिकारियों ने क्रान्ति
के लिए डकैतियों को अपनी कार्यप्रणाली का अंग बना लिया था। बंगाल
के एक प्रसिद्ध पत्र युगान्तर के एक लेख से इस बात का परिचय मिलता है
कि पवित्र साध्य के लिए डकैतियों को क्रान्तिकारी अनुचित नहीं समझते
थे।