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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

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पृष्ठ 138

चन्द्रशेखर आजाद 139
नेता थे, अतः दल के सारे पैसों को अपने पास रखते थे, ताकि उनका अप-
व्यय न हो। वैसे ही दल के पास सदा पैसे की कमी बनी रहती थी। अतः
आजाद एक-एक पैसे को बहुत सोच-समझकर खर्च करते थे। इस विषय
में वीरेन्द्र की निम्नलिखित पंक्तियाँ विशेष उल्लेखनीय हैं—
"अपने खर्चों के विषय में भी आजाद बहुत सचेत थे। उनका दृष्टि-
कोण यह था कि जो भी रुपया मिलता है, वह लोग उन्हें इसलिए देते हैं
कि यह क्रान्तिकारी युवक अपना सारा समय देश के लिए लगाते हैं और
कोई काम नहीं कर सकते। इसलिए उनके गुजारे के लिए इधर-उधर से
रुपया मिल जाता है। यह किसी प्रकार की फिजूलखर्ची पर नहीं लगाना
चाहिए। चूँकि आजाद पार्टी के नेता थे। अतः रुपया भी वह अपने पास
ही रखते थे। स्वयं ही अपने साथियों में बाँटते थे। आज के हालात तो
कुछ और हैं। कोई जमाना था, विशेषतः जिन दिनों लाहौर में साण्डर्स की
हत्या हुई थी या विधान सभा में बम फेंका गया था, उन दिनों आजाद हर
साथी को चार आने प्रतिदिन दिया करते थे। किन्तु उनके कुछ साथी ऐसे
भी थे यशपालसिंह जैसे, जिन्हें सिनेमा देखने का शौक था। वह आजाद से
पैसे माँगते तो आजाद उन्हें साफ इन्कार कर देते। कह देते जो कुछ रुपया
तुम्हें देते हैं इसे तुम्हें अपने खून से वापस करना होगा। सिनेमा की
बर्बादी एक क्रान्तिकारी के लिए उचित नहीं है।
एक नेता के लिए इस प्रकार का आदर्श दलीय अनुशासन आवश्यक
भी है। इसलिए वह सदा अपने मित्र साथियों को सुरा, सुन्दरी एवं धूम्र-
पान से दूर रहने की सलाह देते थे। और स्वयं इन सबसे पूर्णतया दूर
रहते थे।
यह सच है कि आजाद एक निर्धन परिवार में उत्पन्न हुए थे और
उन्होंने कोई समुचित शिक्षा भी प्राप्त नहीं की थी, किन्तु उनमें नेतृत्व की
एक जन्मजात प्रतिभा थी। उनके इसी गुण के कारण उनके दल में कभी
उनके विरुद्ध आवाज नहीं उठाई गई तथा दल आदर्श रूप से निरन्तर
कार्य करता रहा। उनके इस कुशल नेतृत्व की प्रशंसा तथा उनके दृढ़ व्यक्तित्व
पर प्रकाश डालते हुए इस दल के सदस्य रह चुके श्री सत्यभक्त ने
लिखा है—