अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
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"आजाद के साथियों यानी उनके नेतृत्व में काम करने वालों में शायद
ही किसी को उनसे कम स्कूली शिक्षा मिली होगी। शायद ही कोई उनसे
अधिक गरीबी की हालत में उत्पन्न हुआ होगा। उनके साथ उनके पिता,
भाई या अन्य किसी सम्बन्धी की देशभक्ति, त्याग और तपस्या या अन्य
किसी प्रकार के बड़प्पन की छाया भी नहीं लगी हुई थी। अमर शहीद
भगतसिंह आदि अपने साथियों में उन्होंने नेता का पद पुस्तकीय ज्ञान पर
आधारित थोथे बड़प्पन पर ही नहीं, व्यावहारिक सूझ-बूझ, अदम्य साहस
और सर्वोपरि अपने साथियों की सुख-सुविधा की हार्दिक स्नेहपूर्ण चिन्ता
रखकर और गाढ़े समय में कुशल नेतृत्व प्रदान करके ही पाया। अपने
साथियों और सम्पर्क में आने वालों के जीवन में केवल एक राजनीतिक
मुख्य के रूप में ही नहीं, एक व्यक्तिगत भावमुख्य के रूप में घर कर लेने
के अपने गुण विशेष में ही आजाद की सफलता निहित थी। उनके अकृत्रिम
स्नेहपूर्ण व्यक्तिगत व्यवहार ने ही उन्हें साथियों का प्रिय नेता बना दिया
और उनके हृदय में अपने लिए ऐसा विश्वास उत्पन्न कर दिया कि वे
उनके संकेत मात्र पर प्राण देने के लिए तैयार रहा करते थे। दल में
आजाद के नेतृत्व को स्वीकार करने के सम्बन्ध में कभी कोई झंझट या
झगड़ा नहीं हुआ। यह बात आजाद की प्रशंसा की तो है ही साथ ही उन
साथियों की सच्चाई, लगन, निरभिमानता को भी यह भली-भाँति व्यक्त
करती है, जो विद्या, बुद्धि, त्याग और बलिदान कर सकने की अपनी
तत्परता में किसी प्रकार भी कम न थे।"
वस्तुतः आजाद के ही कुशल नेतृत्व का यह परिणाम था कि दल के
अन्य सभी सदस्य उनसे अधिक शिक्षित एवं अपने घरों से अच्छी आर्थिक
स्थिति वाले होने पर भी दल में एकता के सूत्र में बँधे हुए थे।
वन में शेर का कोई भी संस्कार या राज्याभिषेक नहीं किया जाता
फिर भी वह अपने स्वयं के विक्रम से वन का राजा बन जाता है और
मृगेन्द्र कहा जाता है, इसी प्रकार पारिवारिक अथवा अन्य किसी प्रकार
की पृष्ठभूमि न होने पर आजाद अपनी योग्यता के बल पर क्रान्तिकारियों
के दल के नेता बने और क्रान्तिकारी आन्दोलन के इतिहास में उन्होंने एक
सर्वथा नवीन अध्याय की रचना की।