सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

पृष्ठ 112, कुल 148 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 112

चन्द्रशेखर आजाद 115

दी। वह रुपया देना नहीं चाहता था। उसने सोचा था, पुलिस आजाद के
पीछे लगी रहती है। वह स्वयं तो रुपया माँगने के लिए आएँगे नहीं, किसी
को भेजेंगे तो टाल दूंगा। फिर क्यों न रुपए को हड़प लिया जाए?
तिवारी बोला—"तुम तो आजाद को अच्छी तरह जानते हो। वह
वचन को भंग करने वाले को कभी क्षमा नहीं करते, भलाई इसी में है कि
तुम रुपए मुझे दे दो।"
प्रेस के मालिक ने कहा—'पूरे रुपए तो मेरे पास नहीं हैं, केवल दो
हजार हैं, यदि चाहो तो मैं इस समय दो हजार दे सकता हूँ।"
तिवारी ने सोचा कि भागते भूत की लंगोटी ही सही! मुफ्त के ही
दो हजार क्या कम हैं? वह बोला—
"अच्छी बात है, दो हजार ही लाओ। मैं किसी तरह आजाद को मना
लूँगा।"
प्रेस के मालिक ने दो हजार रुपए तिवारी को दे दिए, उसने सोचा
यदि दो हजार दे देने से बला टल जाए तो क्या बुरा है? फिर भी छ:
हजार रुपए तो अपनी जेब में ही रहेंगे।
तिवारी रुपया लेकर चला गया। वह उसी दिन झाँसी जाकर आजाद
से मिला। उसने आजाद से कहा—"मैं प्रेस के मालिक से बात कर आया
हूँ। वह 23 फरवरी को ठीक दस बजे दिन में कम्पनी बाग में लाइब्रेरी के
सामने वाले पेड़ के नीचे जो नाले के पास है, आपसे मिलेगा और आपको
रुपए दे देगा।