अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा
पृष्ठ 103, कुल 148 में से
संदर्भ में पढ़ें106 चन्द्रशेखर आजाद
दल की महिलाओं को इतनी जल्दी कहाँ भेजा जाए, यह भी एक विराट
समस्या थी। इस मकान के बगल में एक इन्जीनियर रहता था। कही वह
पुलिस को बम विस्फोट की सूचना न दे दे, इस विपत्ति को टालने के लिए
यशपाल उसके पास गए। उन्होंने इन्जीनियर को अपनी सारी कहानी बता
दी और उससे निवेदन किया कि वह कम-से-कम आधे घण्टे तक विस्फोट
की सूचना पुलिस को न दे। इस बीच सारे क्रान्तिकारी वहाँ से चले
जाएंगे, तभी पुलिस को इसकी सूचना दी जाए। क्रान्तिकारियों की भार-
नाओं का सम्मान करते हुए इन्जीनियर ने उनकी बात मान ली। अतः
सभी क्रान्तिकारी इस बीच वहाँ से सुरक्षित निकल गए।
सुखदेवराज घायल थे, किन्तु उन्हें किसी अस्पताल में भर्ती कराना
सम्भव नही था। इसका समाधान भी धन्वन्तरि ने निकाल लिया। दया-
नन्द आयुर्वेदिक कालेज लाहौर के प्रधानाचार्य डाक्टर आसामन्द राष्ट्रवादी
विचारों के व्यक्ति थे। धन्वन्तरि कभी उनके विद्यार्थी रह चुके थे। डा०
आसामन्द ने अपने घर पर रखकर सुखदेवराज की चिकित्सा का भार
अपने ऊपर ले लिया। उन्होंने सुखदेवराज के पैर का आपरेशन किया।
उनकी चिकित्सा से सुखदेवराज का पाँव शीघ्र ठीक हो गया। इसके बाद
उन्हें अमृतसर भेज दिया गया।
इस प्रकार अनवरत असफलताओं के बाद आजाद के सामने दल को
पुनः संगठित करने का प्रश्न सर्वप्रथम था। इसके लिए पैसों की आवश्य-
कता थी। पैसों का प्रबन्ध करने के लिए लाहौर से चले गए और दिल्ली
पहुंचे। पूर्ववर्णित गाडोदिया स्टोर डकैती उन्होंने इसी समय डाली थी।
यशपाल प्रकरण :
यद्यपि दल सदस्यो द्वारा विवाह करने का विरोध नहीं करता था,
फिर भी सक्रिय क्रान्तिकारियों से अपेक्षा की जाती थी कि वे अविवाहित
रहें। यदि कोई सदस्य विवाह करना चाहता था तो उसे दम से इसके लिए
अनुमति लेनी पड़ती थी। गाडोदिया स्टोर डकैती के बाद दल ने एक कार-
खाना दिल्ली में खोला था। दिखाने के लिए तो यह साबुन, तेल बनाने का
कारखाना था, किन्तु इसमें बम बनाने में प्रयुक्त होने के लिए विला-