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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

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पृष्ठ 104

चन्द्रशेखर आजाद 107
एसिड बनता था। इस कारखाने का संचालन श्री अज्ञेय करते थे। अज्ञेय
के अतिरिक्त यहाँ कैलाशपति, विमलप्रसाद जैन, उनकी पत्नी, यशपाल
और प्रकाशवती भी रहते थे। यशपाल और प्रकाशवती के सम्बन्ध अत्यन्त
अन्तरंग हो गए थे। वे दोनों साथ-साथ रहते हुए देखे जाने लगे। यह दल
के नियमों के विरुद्ध था। अतः दल ने निर्णय लिया कि यशपाल को गोली
मार दी जाए। यह काम वीरभद्र तिवारी को सौंपा गया। यशपाल को
गोली मारने के बजाय तिवारी ने यह बात यशपाल को बता दी। यशपाल
हाथ में रिवाल्वर लेकर कारखाने में गए और प्रकाशवती को लेकर लाहौर
चले गए।
इसके बाद यशपाल ने प्रकाशवती से विवाह कर लिया। बाद में वह
आजाद से मिले। यद्यपि आजाद एवं यशपाल का मनमुटाव दूर हो गया,
किन्तु दलीय अनुशासन की अवहेलना करने के कारण वीरभद्र तिवारी
को दल से निकाल दिया गया तथा यह कारखाना भी बन्द कर दिया
गया।
यशपाल के विरुद्ध यह कठोर निर्णय लिए जाने का कारण दलीय अनु-
शासन के साथ ही यह भी था कि यशपाल प्रकाशवती को भगाकर लाए
थे। उसके माँ-बाप द्वारा की गई कार्यवाही दल के लिए घातक सिद्ध हो
सकती थी। इस प्रकार आसक्ति में फँसकर कई सदस्य दल को हानि
पहुँचा चुके थे।