भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)
Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas
सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा
DevanagariHindipublished690 पृष्ठ
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फुटकरपद । ५५७
ब्रह्मरूप अनूप मुनिवर पराशर कुलभूषणं ।
श्रीकृष्णचरित पुनीत वर्णत शुकमुनिचरण प्रणम्यहं ॥ ५ ॥
त्रिभुवन उजागर कृपासागर द्वंद्व संकट मोचनं ।
प्रेममद मातेरहें नित शुकमुनिचरण प्रणम्यहं ॥ ६ ॥
निरालंब निहभर्म निसिदिन स्थिर बुद्धि निकेतनं ।
धर्मधारी ब्रह्मचारी शुकमुनिचरण प्रणम्यहं ॥ ७ ॥
पतित पावन भर्म नसावन शरणागत सुखदायकं ।
मायाजीतं गुणातीतं शुकमुनिचरण प्रणाम्यहं ॥ ८ ॥
श्रीशुकदेव अष्टक परमसुंदर पठत पाप नशायकं ।
चरणदास शुकदेव स्वामी भक्ति मुक्ति फलदायकं ॥ ९ ॥