सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 82, कुल 788 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 82

गुरुमुखी में लिखा पहला पत्र : चाची के नाम

13 अप्रैल, 1919 को जलियाँवाला बाग़ में अंग्रेज़ों ने बर्बर क़त्लेआम किया।
12 वर्षीय भगतसिंह दूसरे दिन वहाँ गये और रक्त-सनी मिट्टी लेकर घर लौटे, तो
कई सवाल उनके मन में थे। अपनी छोटी बहिन बीबी अमरकौर से उन्होंने अपने मन
की बातें कीं।
21 फ़रवरी, 1921 को महन्त नारायणदास ने ननकाना साहिब में 140 सिखों
को बड़ी बेरहमी से मार डाला। बहुतों को ज़िन्दा ही जला दिया। लाहौर से अपने
गाँव बंगा जाते समय भगतसिंह ने वह स्थान देखा और 5 मार्च को हुई बड़ी कॉन्फ़्रेंस
भी देखी। वे ननकाना साहिब से इस घटना सम्बन्धी एक कैलेण्डर भी लेते गये थे।
इस घटना से पूरे पंजाब के गाँवों में अंग्रेज़ सरकार के ख़िलाफ़, जिसने महन्त की
मदद की थी, एक ज़ोरदार आन्दोलन उठा। हर गाँव में काली पगड़ियाँ बाँधने और
पंजाबी पढ़ने का रिवाज़ चल पड़ा। भगतसिंह भी इसके प्रभाव में आये। भाई-बहिन
– बीबी अमरकौर और भगतसिंह – ने पंजाबी पढ़नी व लिखनी सीखी। यह पत्र
उसी समय का है, जो 1910 में जेल-यातनाओं से शहीद हुए चाचा स्वर्ण सिंह की
पत्नी चाची हुकमकौर को लिखा गया था। हिज्जे जैसे के तैसे दिये जा रहे हैं। गुरुमुखी
लिपि में लिखा भगतसिंह का यह पहला पत्र है। बाद में पंजाबी में भगतसिंह ने
बहुत-से लेख भी लिखे। – स.
15 नवम्बर, 1921
मेरी परम प्यारी चाची जी,
नमस्ते।
मुझे ख़त लिघ लिघने (लिखने) में देरी हो गयी है। सो उम्मीद है कि आप
माफ़ करोगे। भाइया जी (पिता किशन सिंह) दिल्ली गये हुए हैं। भेभे (बेबे –
माँ) मोराँवाली को गयी हुई हैं। बाक़ी सब राजी-खुशी है। बड़ी चाची जी को मत्था
टेकना। माता जी को मत्था टेकना, कुलबीर, कुलतार सिंह को सति श्री अकाल
या नमस्ते।
आपका आज्ञाकारी
भगतसिंह
76 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़