भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 729, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंयार्ड¹ के जासूस आयरलैण्ड में बहुत संख्या में आ पहुँचे थे। उन लोगों का हौसला
बहुत बढ़ गया था। वे तो सिनफिन लोगों (क्रान्तिकारी) की सभाओं तक में पहुँचते
और तलाशी में अंग्रेजी सेना की सहायता करते। बहुत से निर्दोष व्यक्ति, जिन्होंने
कि शायद शस्त्र कभी छुए भी न होंगे, उनकी कोप-दृष्टि से न बच सके। वे ‘जी’
कहलाते थे। उस वक़्त बहुत से ‘जी’ मारे भी गये और मारने वाले सदा बचते ही
रहे। आख़िर तंग आकर उन लोगों ने घरों से बाहर निकलना ही बन्द कर दिया।
एक-एक दिन जासूसों की हत्या पर ख़ूब वाद-विवाद हुआ। मेरी अनोखी सूझ! मैंने
कहा कि जासूसों की हत्या की बजाय, ब्रिटिश सरकार के प्रमुख प्रतिनिधि
वायसराय महोदय पर हाथ साफ़ करने से बहुत प्रभाव होगा। बात अच्छी थी। सभी
ने इसे स्वीकार कर लिया।
छठा परिच्छेद
लाट साहब पर हमला
निश्चय होते ही हमने सभी मित्रों से परामर्श लिया। सभी सुदृढ़ तथा निर्भीक साथी
हमारा साथ देने के लिए तैयार हो गये। तीन मास तो तैयारी में ही लग गये।
वायसराय महोदय की प्रतीक्षा में कितनी ही बार बड़ी निराशा भी हुई। उनका प्रोग्राम
विशेष तौर से गुप्त रखा जाता। कई स्थानों पर जहाँ कि उनका जाना आवश्यक होता,
वे न जाते। कितनी ही बार कुछेक क्षण के हेर-फेर से बच गये थे। आते आते
एकदम एक मोड़ पर मुड़ जाने से ही, कई बार उनके प्राण बच गये। इन तीन मास
में हम 12 दफे आक्रमण करने की पूरी तैयारी कर वायसराय महोदय की प्रतीक्षा
ही करते रह गये। परन्तु हर बार उनका न आना, या आते-आते मुड़ जाना ही कारण
हुआ। 11 नवम्बर के दिन महायुद्ध की सन्धि होने के उपलक्ष्य में होने वाले उत्सव
में सम्मिलित होने के लिए उन्हें जाना था। ग्रेटीन ब्रिज पर से गुज़रते समय उन पर
बम गिरा दिये जायें, यही हमने सोचा। ठीक समय पर हमारे सभी साथियों ने बम
तैयार कर लिए। पिन खोले, कितनी ही देर तक वे प्रतीक्षा करते रहे। परन्तु
वायसराय महोदय न पधारे। उस दिन बर्फ़ गिर रही थी : तो भी हम पुल पर डटे
रहे। इतने में हमारे एक परिचित मित्र उधर से गुज़रे : उन्होंने समझ लिया, और
व्यंग्य मिश्रित स्वर में इतना ही कहा, ‘क्या खूब। बर्फ़ से बचने के लिए यह स्थान
तो खूब ढूँढ़ा।' हम चौंक पड़े। हमारी ओर देखकर कोई भी व्यक्ति सन्देह कर
सकता था। हम एकाएक वहाँ से चल दिये। कुछ ही क्षण बाद सैनिक लारियों ने
- स्कॉटलैण्ड यार्ड इंग्लैण्ड के जासूस विभाग का नाम है।
आयरिश स्वतन्त्रता-संग्राम / 723