भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 730, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंपुल को घेर लिया और आने जाने वाले की तलाशी ली जाने लगी। हम बाल-बाल
बच गये। बात यह हुई थी कि हमें पहचान कर अथवा सन्देहवश किसी जासूस
ने तुरन्त गवर्नमेण्ट हाउस को टेलीफ़ोन कर दिया था। इसी कारण वायसराय महोदय
नहीं आये।
इससे हम बहुत निराश हो गये। कुछ आत्मग्लानि-सी भी मालूम होने लगी।
सोचने लगे – क्या हम उतना भी नहीं कर पायेंगे? परन्तु यह अवस्था कुछ अधिक
देर नहीं रही। शीघ्र ही हमें पता चल गया कि वायसराय महोदय उत्तर की ओर से
डबलिन आ रहे हैं। संवाद-पत्रों में तो प्रकाशित हो चुका था कि वे विदेश गये हैं।
सम्पादकों को शायद यह विश्वास भी था, परन्तु हमें तो ख़ूब मालूम था कि वे
‘फ़्रेंच पार्क को रास्कामन’ में अपने मित्रों के साथ आनन्द विहार में निमग्न थे। वहाँ
पर वे बिल्कुल आरक्षित थे। बहुत थोड़ी-सी सेना वहाँ रहती थी। ‘लौज’ भी कोई
बड़ी मज़बूत न थी। हम वहाँ पर बड़ी सुगमता से उन पर आक्रमण कर सफल
हो सकते थे, परन्तु हमने जान-बूझकर वैसा नहीं किया। हम उस जगत प्रसिद्ध
व्यक्ति पर, जगत प्रसिद्ध फोनिक्स पार्क आयलैण्ड में अंग्रेज़ी शक्ति का मुख्य केन्द्र
के ठीक द्वार पर आक्रमण करके समस्त संसार का ध्यान अपनी ओर आकर्षित
करना चाहते थे। ज़रा सोचिये तो जिस दिन संवाद-पत्रों में यह समाचार निकलेगा,
“आयरलैण्ड-स्थित अंग्रेज़ों के सर्वोपरि प्रतिनिधि, ब्रिटिश सेना के फ़ील्ड मार्शल,
फोनिक्स पार्क के ठीक सामने, जहाँ पर कि कुछ ही मिनट में बीस हज़ार से
अधिक सब प्रकार के आधुनिक शस्त्रों से सुसज्जित सैनिक आ एकत्र हो सकते
हैं, क्रान्तिकारियों के द्वारा मार दिये गये।” – उस दिन कैसा लुत्फ़ आयेगा? क्या
यह समाचार पढ़कर संसारभर के लोग यह न कहने लगेंगे कि वे वीर क्रान्तिकारी
सच्चे देशभक्त हैं। वे भीरु नहीं, कायर नहीं, बोदे नहीं, स्वार्थी नहीं हैं! उन्हें कुछ
न कुछ शिकायत ज़रूर है। परन्तु वह है क्या? उसे जानने के लिए लोग अधीर न
हो उठेंगे?...हाँ वही तो!
हमें विश्वस्त सूत्र से पता चल गया कि वायसराय महोदय 19 दिसम्बर
1919 के दिन वायसरीगल लौज फोनिक्स पार्क में पहुँचेंगे। बड़े-बड़े अफ़सर –
यहाँ तक कि लौज के प्रबन्धक इस समाचार से अनभिज्ञ रखे गये थे। परन्तु हमें
तो तिथि के साथ समय भी मालूम था। हम तो यह भी जान गये थे कि 11
बजकर 40 मिनट पर उनकी गाड़ी टर्मिनस न जाकर ऐशटाउन स्टेशन पर ही
खड़ी हो जायेगी। कैसे पता चला, यह बताने का अभी समय नहीं आया।
ऐशटाउन डबलिन नगर के केन्द्र से 4 मील की दूरी पर मीथ की ओर जाने
वाली सुन्दर रमणीक सड़क के निकट है। उसे बड़ी सड़क से सम्बन्धित करने
के लिए एक छोटी-सी सड़क जाती है जोकि 200 गज लम्बी है। दोनों सड़कों
के संगम पर एक सराय भी है। आयरिश भाषा में ऐसे ही सार्वजनिक स्थान को
724 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़