भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 664, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंअविभाज्य हैं, सामान्य हित के लिए समान रूप से सांघातिक हैं : एक वर्ग से
निरंकुश पैदा होते हैं, तो दूसरे वर्ग से, निरंकुशता के समर्थक : हमेशा इन्हीं दोनों
के बीच सार्वजनिक स्वतन्त्रता का व्यापार चलता रहता है : एक ख़रीदता है, दूसरा
बेचता है।¹
पृष्ठ 182 (117)
“ओलावृष्टि कुछेक क्षेत्रों को बरबाद कर डालती है, पर इससे अकाल बिरले
ही पड़ता है। दंगे-फसाद और गृहयुद्ध सदारत करने वाले लोगों को काफ़ी चौंका
देते हैं; फिर भी वे राष्ट्रों के लिए कोई वास्तविक संकट नहीं पैदा करते, जब तक
इस बात को लेकर विवाद चलता है कि कौन उन पर निरंकुश शासन करे। उनकी
वास्तविक समृद्धि या विपदाएँ तो उनकी स्थायी स्थितियों से पैदा होती हैं। जब
सब कुछ जुवे तले कुचल कर रख दिया जाता है, तभी सब कुछ नष्ट हो जाता
है; तभी ये शासक, इत्मीनान से सब कुछ नष्ट करने के बाद, एक मुर्दा ख़ामोशी
पैदा कर देते हैं, जिसे वे शान्ति कहते हैं।”
पृष्ठ 176²
पृष्ठ 183 (118)
फ्रांसीसी क्रान्ति³ :
अमेरिका : अमेरिकी स्वतन्त्रता-संग्राम का फ्रांस की स्थिति पर भारी प्रभाव
पड़ा। (1776)
टैक्स :
‘राजा’ के नाम पर काम करने वाले कोर्ट या मन्त्रिमण्डल ने मनमाने ढंग से
टैक्सों के फ़रमान तैयार किये और उसे पार्लियामेण्ट⁴ में इन्दराज किये जाने के लिए
भेज दिया, क्योंकि जब तक पार्लियामेण्ट उनका इन्दराज नहीं कर लेती, तब तक
वे लागू नहीं हो सकते थे।
कोर्ट का दावा था कि पार्लियामेण्ट की सत्ता को एतराज़ का कारण बताने
के अलावा और कोई अधिकार न था, जबकि वह (यानी कोर्ट या मन्त्रिमण्डल)
अपने पास यह फ़ैसला करने का अधिकार सुरक्षित रखे हुए था कि कारण
वाजिब हैं या ग़ैर-वाजिब, और कि तदनुसार ही वह अपनी मर्ज़ी से चाहे तो
- वही 2. वही
- फ्रांसीसी क्रान्ति के बारे में भगतसिंह के इन नोट्स के स्रोत का पता नहीं चलता।
- पार्लियामेण्ट : वास्तव में यह कोई निर्वाचित प्रतिनिधियों का निकाय नहीं, बल्कि राजा
के सलाहकारों का एक निकाय या इजलास हुआ करती थी।
658 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़