भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 663, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंदास अपनी बेड़ियों में सब कुछ खो देते हैं, यहाँ तक कि उनसे निजात पाने
की इच्छा भी!¹
सबसे ताक़तवर का अधिकार
“सत्ताधिकारियों का आज्ञापालन करो। यदि इसका मतलब ताक़त के आगे
झुकना है, तो यह आदेश अच्छा तो है लेकिन गैर-ज़रूरी है; मेरा कहना है कि
इसका कभी उल्लंघन नहीं होगा।”²
दासता का अधिकार
“क्या तब पराधीन जन अपनी अस्मिताओं का इस शर्त पर त्याग कर दें कि
उनकी सम्पत्ति भी ले ली जाये? मैं समझ नहीं पाता कि उनके लिए क्या शेष रह
जायेगा?
“कहा जा सकता है कि निरंकुश शासक अपने शासितों के लिए नागरिक शान्ति
सुनिश्चित करता है। हो सकता है, ऐसी ही बात हो; लेकिन इससे उनको मिलता क्या
है, जबकि युद्ध, जो उसकी महत्त्वाकांक्षाओं के चलते उन पर थोप दिये जाते हैं, तथा
उसकी अतोषणीय लोलुपता और उसके प्रशासन के सन्ताप, उनके अपने बैर-विरोध
से कहीं अधिक ही उन्हें तंग करते हैं? [पृष्ठ 181 (116) पर जारी]
“यह कहना, कि एक आदमी अपनेआप को बिना किसी एवज में यों ही सौंप
देता है, एकदम वाहियात और अकल्पनीय बात है।”
इस तरह की बात, चाहे एक आदमी दूसरे आदमी को सम्बोधित करके कहे
या राष्ट्र को सम्बोधित करके कहे, हमेशा मूर्खतापूर्ण ही कही जायेगी :
“मैं पूरी तरह से तुम्हारी क़ीमत पर और पूरी तरह से अपने लाभ के लिए
तुमसे एक समझौता करता हूँ, और मैं इसे तब तक लागू किये रखूँगा, जब
तक मैं चाहूँगा, और तुम भी इसे तब तक लागू किये रखोगे जब तक मैं
चाहूँगा।”³
समानता :
यदि तुम राज्य को स्थायित्व प्रदान करना चाहते हो, तो इन दो चरम अवस्थाओं
को, जहाँ तक सम्भव हो सके, क़रीब लाओ : न तो धनिकों को बरदाश्त करो,
न ही भिखारियों को। ये दोनों ही स्थितियाँ, जो स्वाभाविक तौर पर एक-दूसरे से
- रूसो, सोशल कॉन्ट्रैक्ट
- वही 3. वही
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 657