भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
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शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
DevanagariHindipublished788 पृष्ठ
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दूसरा या आधुनिक प्रकार का सम्प्रदाय व्यक्तियों के बीच एक क़रार के जरिये
राजनीतिक समाज की संस्थाबद्धता से सम्बन्धित है। चिन्तन की इस शाखा के
प्रमुख विचारक हूकर¹, हॉब्स², लॉक³ और रूसो⁴ हुए हैं।
लोक-स्वतन्त्रता के हिमायती
ह्यूजिनॉट⁵
- विण्डिसिए कोण्ट्रा टाइरैनॉस⁶ (1576) ह्यूजिनॉट लैंगु़एत की रचना।
इसमें दलील दी गयी थी कि राजा अपनी सत्ता जनता की इच्छा से प्राप्त करे, और
कि यदि राजा क़ानूनों के परिपालन में उस क़रार को भंग करे जो उसके और जनता
के बीच संयुक्त रूप से राजशाही की स्थापना के समय किया गया होता है, तब
जनता भी राज्यनिष्ठा से मुक्त हो जायेगी।
बुका़नन⁷ : - बुका़नन का भी यही कहना था कि राजा और जनता एक पैक्ट के तहत
वचनबद्ध होते हैं, और कि यदि राजा इसे भंग कर दे, तो वह अपने अधिकार भी
खो बैठता है। - रिचर्ड हूकर : देखें नोटबुक पृष्ठ 107 (80) का सन्दर्भ 1
- टॉमस हॉब्स : देखें नोटबुक पृष्ठ 108 (81) का सन्दर्भ 2
- जॉन लॉक (1632-1707) : अंग्रेज़ दार्शनिक और एक अग्रणी व्यवहारवादी। उसने
सामाजिक संविदा के हॉब्स के सिद्धान्त की आलोचना की जो राजतन्त्र के समर्थन तक जाते
थे; 1689 में अपनी प्रसिद्ध कृति टू ट्रीटाइजेज़ ऑन गवर्नमेण्ट लिखी, जिसने आगे चलकर
अमेरिकी संविधान निर्माताओं को प्रभावित किया; उसकी दूसरी प्रसिद्ध पुस्तक एस्से कंसर्निंग
ह्यूमन अण्डरस्टैण्डिंग है जो ऐन्द्रिक अनुभव पर आधारित ज्ञान की अवधारणा के समर्थन में
है। - ज्याँ जाक रूसो : देखें नोटबुक पृष्ठ 119 (92) का सन्दर्भ 1
- ह्यूजिनात : यह नाम सोलहवीं सदी के मध्य से फ्रांस के प्रोटेस्टेण्टों को दिया जाने लगा
था, कारण कि तूर्श शहर में स्थानीय प्रोटेस्टेण्ट ईसाई रात में राजा ह्यूगो के फाटक पर मुलाक़ात
किया करते थे। राजा ह्यूगो को जनता एक दैवीय शक्ति मानती थी। - विण्डीसिए कोण्ट्रा टाइरैनस : ह्यूबर्ट लैंगु़एत (1518-1581) की रचना जिसमें निरंकुश
शासन के विरुद्ध प्रतिरोध करने का सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया था; परन्तु इसके लिए यह
भी ज़रूरी बताया गया था कि ऐसा प्रतिरोध एक समुचित रूप से गठित आधिकारिक निकाय
द्वारा ही किया जाना चाहिए। - जॉर्ज बुका़नन (1506-1582) : स्कॉट विचारक, जिन्होंने अपनी रचना डि ज्यूर रेग्नी
एपुड स्कोतोस (1579) में लिखा कि राजा उन परिस्थितियों से बँधा होता है जिनके तहत
उसे सर्वोच्च सत्ता प्रदान की गयी; और निरंकुश शासकों का प्रतिरोध करना तथा यहाँ तक
कि उन्हें दण्डित करना भी न्यायपूर्ण है।
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