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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 649, कुल 788 में से

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पृष्ठ 649

पृष्ठ 170 (105)
नया युग
सुधार-काल के बाद, पोप की सत्ता चरमरा गयी, तथा शासक और जनता दोनों
के दिमाग़ आज़ादी की लहर में तरंगायित हो चले। लेकिन एक ऊहापोह की स्थिति
भी पैदा हो गयी। इस नयी स्थिति से निपटने के लिए बहुतेरे चिन्तकों ने राज्य के
सवाल पर सोचना शुरू कर दिया। चिन्तन की विभिन्न शाखाएँ उठ खड़ी हुईं।
मैकियावेली :
मैकियावेली — इस मशहूर इतालवी राजनीतिक विचारक ने सरकार के
गणतान्त्रिक रूप को सर्वोत्तम माना, लेकिन सरकार के इस रूप के स्थायित्व पर
सन्देह होने के कारण, उसने एक सशक्त राजतन्त्रात्मक शासन को सुरक्षित रखने
के सिद्धान्तों का भी निरूपण किया, और इसी नाते उसने “द प्रिन्स”¹ की रचना
की।
एक केन्द्रीकृत सरकार की उसकी हिमायत का यूरोप के राजनीतिक सिद्धान्त
और व्यवहार पर भारी प्रभाव पड़ा।
मैकियावेली सम्भवतः पहला लेखक था जिसने एकदम धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण
से “राजनीति” पर विचार किया।
अन्य विचारक
क़रार और समझौता
अन्य विचारकों में से ज़्यादातर ने क़रार या समझौते के सिद्धान्त का समर्थन
किया। रोमन क़ानून में (क़रार) व्यक्तियों के बीच एक सहमति का नतीजा हुआ
करता था और इसका दायरा समझौते से छोटा हुआ करता था, जबकि समझौता
क़रार के साथ-साथ एक बाध्यकारी दायित्व भी होता था।
ऐसे विचारकों के दो अलग-अलग सम्प्रदाय थे। पहले प्रकार का सम्प्रदाय
ईश्वर और मनुष्य के बीच क़रार की यहूदी धारणा पर आधारित सिद्धान्त का
प्रतिपादन करता था, जो समझौते की रोमन धारणा से सम्पूरित था। यह सरकार और
जनता के बीच एक अलिखित समझौते का प्रतिपादन करता था।

  1. द प्रिन्स : 1527 में, इतालवी राजनीतिक चिन्तक मैकियावेली द्वारा लिखी गयी प्रसिद्ध
    पुस्तक, जिसमें राज्यसत्ता हासिल करने के उपायों का विस्तारपूर्वक विवेचन और विश्लेषण
    किया गया है। मैकियावेली और उसकी पुस्तक ने अपने समय तथा बाद के युग में भी राजनीति
    पर काफ़ी प्रभाव डाला।
    शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 643