भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 609, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंअंग्रेज़ मज़दूर नेताओं का विश्वासघात
1911 से 1913 तक के वर्ष आमतौर पर खदान मज़दूर, रेलकर्मियों और परिवहन
मज़दूरों के बेमिसाल वर्ग-संघर्षों का समय था। अगस्त 1911 में, रेलवे की राष्ट्रीय,
दूसरे शब्दों में, आम हड़ताल, फूट पड़ी थी। उन दिनों ब्रिटेन के ऊपर क्रान्ति की एक
धुँधली छाया मँडरा रही थी। लेकिन नेतागण ने इस आन्दोलन को पंगु कर डालने के
लिए अपनी पूरी ताक़त लगा दी। उनका इरादा "देशभक्ति" का था; यह हरकत
अगादिर की उस घटना के समय की जा रही थी, जिसने जर्मनी के साथ युद्ध का
ख़तरा उपस्थित कर दिया था। जैसाकि आज भलीभाँति मालूम है, प्रधानमन्त्री ने
मज़दूर-नेताओं को एक गुप्त बैठक में बुलाया और उनसे पितृभूमि की रक्षा की अपील
की। और नेताओं ने, बुर्जुआ वर्ग को मज़बूत करने के लिए अपने बूतेभर सब कुछ
दिया, और इस प्रकार साम्राज्यवादी नरसंहार के लिए रास्ता साफ़ किया।
(पृष्ठ 3) ह्वेयर इज़ ब्रिटेन गोइंग?$^1$
त्रात्स्की$^2$
<u>पृष्ठ 56 (53)</u>
विश्वासघात :
केवल 1920, यानी 'काले शुक्रवार' के बाद ही, आन्दोलन सीमाओं में वापस
लौटा, जब ख़ानकर्मियों, रेलकर्मियों और परिवहनकर्मियों के त्रिपक्षीय संश्रय के
नेताओं ने आम हड़ताल के साथ विश्वासघात कर दिया।
(पृष्ठ 3)$^3$
सुधार के लिए क्रान्ति का ख़तरा ज़रूरी है :
...ब्रिटिश बुर्जुआ वर्ग ने यह समझ लिया था कि ऐसे उपाय (सुधार) के जरिये
क्रान्ति को टाला जा सकता है। अतः इससे निष्कर्ष निकलता है कि सुधारों तक
- त्रात्स्की की कृति ह्वेयेर इज़ ब्रिटेन गोइंग?
- लिओन त्रात्स्की : लेव दवीदोविच त्रात्स्की (1879-1940) – लेनिनवाद के घोर
विरोधी। रूसी सामाजिक-जनवादी मज़दूर पार्टी (बोल्शेविक) की छठी कांग्रेस में (1917)
बोल्शेविक पार्टी के सदस्य बन गये। अक्टूबर क्रान्ति में महत्त्वपूर्ण हिस्सेदारी। क्रान्ति के
बाद कई सरकारी पदों पर रहे। 1923 में पार्टी की आम नीति और समाजवाद के निर्माण
के लेनिन के कार्यक्रम के ख़िलाफ़ गुटबाज़ी भरा संघर्ष चलाया तथा इस बात का प्रचार
किया कि सोवियत संघ में समाजवाद की विजय असम्भव है। कम्युनिस्ट पार्टी ने
त्रात्स्कीवाद को पार्टी में निम्न पूँजीवादी प्रवृत्ति के रूप में बेनकाब किया और उसे संगठन
व विचारधारा के दृष्टिकोण से पराजित किया। त्रात्स्की 1927 में पार्टी से निकाल दिये गये
ओर 1929 में सोवियत विरोधी गतिविधियों के कारण उन्हें देश निकाला दे दिया गया।
शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 603