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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 608, कुल 788 में से

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पृष्ठ 608

“मान लो यदि मतपेटिकाओं में तुम्हारी जीत के बावजूद हम तुम्हें सत्ता सौंपने
से इन्कार कर दें तो?” [पृष्ठ 54 (51) पर जारी]
“हमने उस पर भी सोच रखा है”, अर्नेस्ट ने जवाब दिया। “और इसका जवाब
हम तुम्हें गोलियों से देंगे। सत्ता, तुम्हीं ने इसे शब्दों का राजा कहा है। बहुत अच्छा!
सत्ता, देखेंगे इसे। और जिस दिन हम चुनाव में विजय हासिल कर लेंगे, और तुम
हमारी इस संवैधानिक और शान्तिपूर्ण ढंग से हासिल की गयी सत्ता को हमें सौंपने
से इन्कार कर दोगे, तो तुम्हारे इस सवाल के जवाब में कि हम क्या करेंगे – उस
दिन, मैं बता दूँ, कि हम तुम्हें इसका जवाब देंगे, हम बमगोलों की गड़गड़ाहट और
मशीनगनों की तड़तड़ाहट से अपना जवाब देंगे।
“तुम हमसे बच नहीं सकते। यह सही है कि तुमने इतिहास को ठीक से पढ़ा
है। यह सही है कि श्रम इतिहास के आरम्भ से ही धूल चाटता आ रहा है। और
यह भी सही है कि जब तक तुम्हारे और तुम्हारे उत्तराधिकारियों के हाथ में सत्ता
रहेगी, तब तक श्रम धूल ही चाटता रहेगा। मैं तुमसे सहमत हूँ। तुमने जो कुछ कहा
है उन सारी बातों से मैं सहमत हूँ। सत्ता ही निर्णायक होगी, जैसाकि हमेशा होता
आया है; यही तो वर्गों का संघर्ष है। जैसे तुम्हारे वर्ग ने पुराने सामन्ती तन्त्र को ध्वस्त
किया, ठीक वैसे ही मेरा वर्ग, मज़दूर वर्ग, तुम्हारे वर्ग को ध्वस्त कर डालेगा। अगर
तुम अपने प्राणिविज्ञान और अपने समाज विज्ञान को भी उतनी ही स्पष्टता से पढ़ो,
जितनी स्पष्टता से तुम इतिहास पढ़ते हो, तो तुम देखोगे कि मैंने जिस हश्र का वर्णन
किया है वह अपरिहार्य है। इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि इसमें एक वर्ष लगेगा,
दस वर्ष लगेंगे या हज़ार वर्ष लगेंगे – यह तय है कि तुम्हारा वर्ग मिट्टी में मिल
जायेगा। और यह सत्ता के जरिये ही होगा। हम मेहनतकश इस शब्द को इतना रट
चुके हैं कि हमारे दिमाग़ इससे झनझना रहे हैं। सत्ता। यह एक राजोचित शब्द है।”
– जैक लण्डन कृत आयरन हील (पृष्ठ 88)
पृष्ठ 55 (52)
आँकड़े¹
इंग्लैण्ड :
1922 – बेरोज़गारों की संख्या = 1,135,000
1926 – यह 1¼ से 1½ मिलियन के बीच
अर्थात 1,250,000 से 1,500,000 के बीच रही है।

  1. स्रोत का पता नहीं
    602 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़