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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 610, कुल 788 में से

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पृष्ठ 610

को भी लागू करवाने के लिए, सिर्फ़ धीरे-धीरे काम करते रहने का सिद्धान्त पर्याप्त
नहीं है, और कि क्रान्ति का एक वास्तविक ख़तरा ज़रूरी है।
(पृष्ठ 29)¹
सामाजिक एकता :
...ऐसा हो सकता है कि एक बार जब हम एक ऐसे विशेषाधिकारप्राप्त वर्ग
के सफाये के लिए उठ खड़े हों, जो रंगमंच से हटना न चाहता हो, तब वर्ग-संघर्ष
की बुनियादी अन्तर्वस्तु, उसी में निहित प्रतीत हो। लेकिन नहीं। मैकडोनाल्ड²
सामाजिक एकता की चेतना “जागृत” करना चाहते हैं। पर किसकी? मज़दूर वर्ग
की एकता तो बुर्जुआ वर्ग के विरुद्ध संघर्ष में उसकी आन्तरिक सुसम्बद्धता की
अभिव्यक्ति होती है।
मैकडोनाल्ड जिस सामाजिक एकता का उपदेश देते हैं, वह शोषकों के साथ
शोषितों की एकता, या दूसरे शब्दों में, शोषण को बनाये रखने के अलावा और कुछ
नहीं है।³
क्रान्ति एक आफ़त :
“रूस की क्रान्ति ने” मैकडोनाल्ड के कथनानुसार, “हमें बड़ा सबक
सिखाया। इसने दिखा दिया कि क्रान्ति एक बरबादी और विपदा के सिवाय और
कुछ नहीं है।” [पृष्ठ 57 (54) पर जारी]
क्रान्ति तो विपदा को ही जन्म देती है लेकिन ब्रिटिश जनतन्त्र ने तो
साम्राज्यवादी युद्ध को जन्म दे दिया...जिसकी बरबादी की तुलना क्रान्ति की
विपदाओं से तो निश्चित तौर पर तनिक भी नहीं की जा सकती। फिर भी, जिस
क्रान्ति ने ज़ारशाही, कुलीनतन्त्र और बुर्जुआ वर्ग को उखाड़ फेंका, चर्च को हिला
कर रख दिया, 13 करोड़ लोगों के एक राष्ट्र या राष्ट्रों के एक समूचे कुल में, एक
नये जीवन का संचार किया, उसके सामने यह घोषणा करने के लिए कि
— क्रान्ति एक विपदा के सिवाय और कुछ नहीं है – ऐसे ही बहरे कानों और
निर्लज्ज चेहरों की ज़रूरत है।
(पृष्ठ 64)⁴

  1. वही
  2. सम्भवतः जेम्स रैम्ज़े मैकडोनाल्ड (1866-1937) : ब्रिटिश लेबर पार्टी के नेता और दो
    बार प्रधानमन्त्री
  3. ह्वेयर इज़ ब्रिटेन गोइंग? 4. वही
    604 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़