भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 590, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंनंगी दीवारें, जेल के ख़यालात,
कितने अँधियारे और उदास हो तुम,
कितना मुश्किल है कि बन्दी हो निष्क्रिय रहना
और देखना सपने आज़ादी के दिनों के।
(मोरोज़ोव)
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تجھے ذبح کرنے کی خوشی اور مجھے مرنے کا شوق
میری بھی مرضی وہی جو میرے صیاد کی ہے۔ 1
पृष्ठ 31 (28)
“हर चीज़ यहाँ है कितनी ख़ामोश, बेजान, फीकी
वर्षों गुज़र जाते हैं यों ही, कुछ पता नहीं चलता,
हफ़्ते और दिन कटते हैं बड़ी मुश्किल से,
देता है सिर्फ़ बोरियत इनका यह सिलसिला।
(मोरोज़ोव)
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लम्बी क़ैद से हमारे ख़्याल हो जाते हैं मनहूस;
भारीपन महसूस होता है हमारी हड्डियों में;
यन्त्रणा की पीड़ा से, लम्हे लगते हैं अन्तहीन
चार डग चौड़ी इस कोठरी में।
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हमें जीना है पूरी तरह अपने हमसफ़र भाइयों के लिए,
हमें देना होगा अपना सर्वस्व उनके लिए,
और उन्हीं की ख़ातिर लड़ना होगा बदनसीबी के ख़िलाफ़!
... ... ...
(मोरोज़ोव)
- मूल में उर्दू में यह शे'र लिखा हुआ है :
तुझे जबह करने की खुशी, मुझे मरने का शौक़,
मेरी भी मर्ज़ी वही है, जो मेरे सैयाद की है।
584 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़