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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 589, कुल 788 में से

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पृष्ठ 589

बल्कि ख़ामोशी, और एक निष्पन्द साँस
जो न जीवन की, न मृत्यु की।
(द प्रिज़न‍र ऑफ़ चिलोन)¹
पृष्ठ 30 (27)
आरोप-सिद्धि के बाद :
अपनी सज़ा सुन लेने के तुरन्त बाद के क्षणों में सज़ा के लिए अभिशप्त व्यक्ति
का दिमाग़ कई मायनों में उस आदमी के दिमाग़ जैसा हो जाता है जो मौत के कगार
पर झूल रहा होता है। चुपचाप, और मानो अन्तःप्रेरित होकर, अब वह उन सभी
चीज़ों से विरक्त हो जाता है जिन्हें उसे छोड़ जाना है, और वह, दृढ़भाव से, अपने
सामने देखता हुआ, उस सच्चाई के प्रति पूरी तरह सचेत हो जाता है, जो
अपरिहार्यतः घटित होने वाली होती है।
(वी.एन. फ़िग्नर)
क़ैदी :
“घुटन होती है इस नीची, गन्दी छत के नीचे;
निचुड़ती जा रही है मेरी ताक़त साल दर साल;
उत्पीड़ित करते हैं मुझे — यह पथरीला फ़र्श,
यह लौह-ज़ंजीरों से बँधी मेज
यह खाट, यह कुर्सी, बँधी हुई ज़ंजीर से
दीवारों के साथ, ताबूत के पटरों की भाँति,
इस चिरस्थायी, मूक, मुर्दा ख़ामोशी में
खुद को बस एक लाश ही समझा जा सकता है।”
“एन.ए. मोरोज़ोव” ²

  1. प्रसिद्ध अंग्रेज़ कवि लॉर्ड बायरन (1788-1824) की इस कविता में जेनेवा झील के पास
    चिलोन के क़िले में क़ैद एक देशभक्त फ्राँस्वा दि बोनिवार के जेल-जीवन का वर्णन किया
    गया है।
  2. निकोलाई अलेक्सान्द्र मोरोज़ोव (1854-1946) : रूसी क्रान्तिकारी, लेखक, कवि और
    वैज्ञानिक; 1880 में लन्दन में मार्क्स से मुलाक़ात और मेनिफ़ेस्टो ऑफ़ द कम्युनिस्ट पार्टी के
    रूसी में अनुवाद का जिम्मा, 1875 से 1878 तक, तथा 1881 से 1905 तक, क़रीब 25 वर्षों
    तक जेल की सज़ा के दौरान, रसायन विज्ञान, भौतिकी, गणित और खगोल विज्ञान पर 28
    पुस्तकों के अलावा कविताएँ और कहानियाँ भी लिखीं।
    शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 583