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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 591, कुल 788 में से

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पृष्ठ 591

आये मुझे आज़ाद करने :
आखिर लोग आये मुझे आज़ाद करने;
मैंने न पूछा क्यों और न सोचा कहाँ,
मेरे लिए तो कुल मिलाकर एक ही था,
बँधे रहना या बन्धनमुक्त होना,
मैंने निराशा से प्यार करना सीख लिया था,
और इस तरह अन्ततः जब वे प्रकट हुए,
और उतार डाले मेरे सारे बन्धन
ये भारी दीवारें बन चुकी थीं मेरे लिए
एक संन्यास-आश्रम – पूरी तरह अपना।
(द प्रिज़नर ऑफ़ चिलोन)
पृष्ठ 32 (29)
“और हम सम्मानित किये गये हैं एक मिशन देकर!
हमने एक कठिन स्कूल पास किया, लेकिन हासिल कर लिया
ऊँचा ज्ञान।
निर्वासन, जेल, और मुश्किल दिनों की बदौलत
हम जान गये हैं और क़ीमत समझते हैं सच्चाई और आज़ादी की
दुनिया की।”
(प्रिज़नर ऑफ़ श्लुसेलबर्ग)¹
एक शिशु की मृत्यु और पीड़ा
‘एक बच्चा पैदा हुआ। उसने सचेत तौर पर न तो कोई बुरा काम किया, न
अच्छा काम किया। वह बीमार पड़ गया, वह लम्बे समय तक काफ़ी तकलीफ़
झेलता रहा, तब तक जब तक कि उस असह्य वेदना से मर नहीं गया। क्यों? क्या
वजह थी? दार्शनिक के लिए यह एक शाश्वत पहेली है।’²

  1. लेनिनग्राद क्षेत्र में स्थित श्लुसेलबर्ग क़स्बे के पास एक द्वीप पर पीटर महान की सेना
    द्वारा 1702 में बनाये गये क़िले को बाद में एक कारागार में बदल दिया गया था। इस कारागार
    में अनेक दिसम्बरवादी क्रान्तिकारी, अराजकतावादी बाकुनिन, पोलिश देशभक्त लुकासोविस्लाग,
    मार्शल दोलगोरुकी, और लेनिन के भाई अलेक्सान्द्र को क़ैद करके रखा गया था (लेनिन के
    भाई को यहीं फाँसी दी गयी)
  2. स्रोत अज्ञात
    शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 585