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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 571, कुल 788 में से

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पृष्ठ 571

राज्य की उत्पत्ति :
...पुराने ज़माने में क़बीलों के बीच होने वाले युद्धों द्वारा भ्रष्ट होते हुए नया रूप
धारण – जीविकोपार्जन के साधन के रूप में ढोर, दास और धन–दौलत लूटने के
लिए ज़मीन और पानी के रास्ते से बाक़ायदा धावे; संक्षेप में, धन–दौलत को दुनिया
में सबसे बड़ी चीज़ समझा जाने लगा, उसे प्रशंसा और आदर की दृष्टि से देखा
जाने लगा और पुराने गोत्र–समाज की संस्थाओं और प्रथाओं को भ्रष्ट किया जाने
लगा ताकि धन–दौलत को ज़बरदस्ती लूटना उचित ठहराया जा सके। अब केवल
एक चीज़ दरकार थी : ऐसी संस्था की, जो न केवल अलग–अलग व्यक्तियों की
नयी हासिल की हुई सम्पत्ति को गोत्र–व्यवस्था की पुरानी सामुदायिक परम्पराओं
से बचा सके, जो निजी स्वामित्व को, जिसकी पहले अधिक प्रतिष्ठा नहीं थी, न
केवल पवित्र क़रार दे और इस पवित्रता को मानवसमाज का चरम लक्ष्य घोषित
कर दे, बल्कि जो सम्पत्ति प्राप्त करने, और इसलिए धन–दौलत को लगातार बढ़ाते
रहने के नये और विकसित होते हुए तरीक़ों पर सार्वजनिक मान्यता की मुहर भी
लगा दे; ऐसी संस्था की, जो न केवल समाज के नवजात वर्ग–विभाजन को, बल्कि
सम्पत्तिवान वर्ग द्वारा सम्पत्तिहीन वर्ग के शोषण किये जाने के अधिकार को और
सम्पत्तिहीन वर्ग पर सम्पत्तिवान वर्ग के शासन को भी स्थायी बना दे।
और यह संस्था भी आ पहुँची। राज्य का आविष्कार हुआ।
(पृष्ठ 129–130)¹
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एक अच्छी सरकार की परिभाषा : “अच्छी सरकार स्व–शासन का विकल्प
कभी नहीं हो सकती।”
“हेनरी कैम्पबेल बैनरमैन ”²
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“हमें यक़ीन है कि सरकार का केवल एक ही रूप है, चाहे इसे जिस नाम
से भी पुकारा जाये, जिसमें अन्तिम नियन्त्रण जनता के हाथों में होता है।”
“अर्ल ऑफ़ बालफोर ”³
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  1. एंगेल्स; परिवार, निजी सम्पत्ति और राज्य की उत्पत्ति
  2. सर हेनरी कैम्पबेल–बैनरमैन (1836–1908) : ब्रिटिश उदारवादी राजनेता, 1905–08
    तक प्रधानमन्त्री रहे।
  3. सम्भवतः आर्थर जेम्स (1848–1930) : प्रथम अर्ल ऑफ़ बालफोर, ब्रिटिश राजनयिक
    एवं प्रधानमन्त्री (1902–1905)
    शहीदेआज़म की जेल नोटबुक / 565