भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
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शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 570, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंसे मिट जायेगा, जितने निश्चित रूप से एकनिष्ठ विवाह के अनुपूरक का,
वेश्यावृत्ति का आर्थिक आधार मिट जायेगा। एकनिष्ठ विवाह की प्रथा एक व्यक्ति
के – और वह भी एक पुरुष के – हाथों में बहुत-सा धन एकत्रित हो जाने के
कारण और इस इच्छा के फलस्वरूप उत्पन्न हुई थी कि वह यह धन किसी दूसरे
की सन्तान के लिए नहीं, केवल अपनी सन्तान के लिए छोड़ जाये। इस उद्देश्य
के लिए स्त्री की एकनिष्ठता आवश्यक थी, पुरुष की नहीं। इसलिए नारी की
एकनिष्ठता से पुरुष के खुले या छिपे बहुपत्नीत्व में कोई बाधा नहीं पड़ती थी।
परन्तु आने वाली सामाजिक क्रान्ति स्थायी दायाद्य धन-सम्पदा के अधिकतर
भाग को – यानी उत्पादन के साधनों को – सामाजिक सम्पत्ति बना देगी और ऐसा
करके सम्पत्ति की विरासत के बारे में इस सारी चिन्ता को अल्पतम कर देगी। पर
एकनिष्ठ विवाह चूँकि आर्थिक कारणों से उत्पन्न हुआ था, इसलिए क्या इन कारणों
के मिट जाने पर वह भी मिट जायेगा? (पृष्ठ 91)¹
पृष्ठ 11 (8)
“भर दो प्याला हे प्रिय मेरे, जो दूर करे
आज विगत के दुख औ' आगत के भय को –
कल? – क्यों, कल हो सकता मैं हो जाऊँ
सात हज़ार वर्षों के कल का अतीत।
... ... ...
यहाँ घने गाछ के नीचे, साथ में रोटी,
मदिरा की सुराही, शायरी की किताब – और तुम
गा रही बगल में मेरे इस निर्जन बीहड़ में!
अब तो स्वर्ग बना यह निर्जन बीहड़ ही!
“उमर ख़य्याम”
राज्य : राज्य की पूर्वापेक्षा है बल प्रयोग की एक सार्वजनिक सत्ता, जो अपने
सदस्यों के सम्पूर्ण निकाय से पृथक हो चुकी हो।
– (एंगेल्स) (पृष्ठ 116)²
- एंगेल्स; परिवार, निजी सम्पत्ति और राज्य की उत्पत्ति
- वही
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