भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
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शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 514, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंतरफ़ से उपयुक्त व्यक्तियों को लगाया जाना चाहिए और उनके दिलो-दिमाग़ में
इस बात को बैठा देना होगा कि वे क्रान्ति के लिए नहीं हैं वरन यह कि क्रान्ति
उनके लिए है। इसी प्रकार से किसानों को भी संगठित करना होगा।
3. स्वतन्त्र भारतीय गणतन्त्र के विचार को प्रचारित करने के लिए प्रत्येक प्रान्त
में साप्ताहिक अख़बार शुरू करने होंगे।
4. समसामयिक घटनाक्रम और विदेशों में प्रचलित विचारों के प्रवाह से
जनसाधारण को अवगत कराने के लिए पुस्तिकाओं और परचों का प्रकाशन।
5. कांग्रेस और दूसरी सार्वजनिक गतिविधियों को जहाँ तक हो सके प्रभावित
करना और उसे अपने उपयोग में लाना।
निजी :
(ए) गुप्त प्रेस की स्थापना करना और उसके जरिये ऐसे साहित्य को प्रकाशित
करना जिसे कि आसानी से खुले में न प्रकाशित किया जा सकता हो।
(बी) इस प्रकार के साहित्य को प्रसारित करना।
(सी) देश के प्रत्येक भाग में ज़िलेवार ढंग से इस एसोसिएशन की शाखाएँ
स्थापित करना।
(डी) जिस भी तरीक़े से सम्भव हो पैसों की व्यवस्था करना।
(ई) उपयुक्त लोगों को दूसरे देशों में भेजना जहाँ पर वे सैनिक या वैज्ञानिक
प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हों ताकि वे खुले विद्रोह के समय पर सेनाओं एवं आयुध
फ़ैक्टरियों की कमान सँभालने के लिए सैन्य या वैज्ञानिक विशेषज्ञ हासिल कर
सकें।
(एफ़) हथियारों एवं गोला-बारूद का आयात करना और इसके अलावा जहाँ
तक सम्भव हो उनका देश के भीतर ही निर्माण करना।
(जी) भारत के बाहर के भारतीय क्रान्तिकारियों के साथ निकट सम्पर्क बनाये
रखना और उनके साथ सहयोग करना।
(एच) एसोसिएशन के सदस्यों को मौजूदा सेना में सूचीबद्ध करना।
(आई) कभी-कभार के प्रतिकारी उपायों और प्रचार के द्वारा अपने ध्येय के
प्रति जनता की हमदर्दी हासिल करना और इस प्रकार हमदर्दों के दल का निर्माण
करना।
सभी सदस्यों को प्रत्येक प्रान्त के विभिन्न ज़िलों के प्रभारी संगठनकर्ताओं द्वारा
भरती किया जायेगा। प्रत्येक सदस्य को अपना पूरा समय एसोसिएशन के कामों को
देने और ज़रूरत पड़ने पर अपनी जान को जोखिम में डालने के लिए तैयार रहना
होगा।
उसे ज़िला संगठनकर्ता के आदेशों का अक्षरशः पालन करना होगा।
508 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़