भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 407, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंसुखदेव को भूख हड़ताल के दौरान
भगतसिंह का एक और पत्र
भूख हड़ताल शुरू होने के बाद भारतीय जनता की चेतना में भगतसिंह व
बटुकेश्वर दत्त गहरे उतरते गये। भगतसिंह के शब्दों में 'हमारा कष्ट सहना फलीभूत
हुआ। सारे देश में एक जन-आन्दोलन छिड़ गया। हम अपने लक्ष्य में सफल रहे।'
13 सितम्बर, 1929 को यतीन्द्रनाथ दास 63 दिन की भूख हड़ताल के बाद शहीद
हो गये। जब उनका पार्थिव शरीर लाहौर से कलकत्ता ले जाया जा रहा था तो हर
बड़े शहर के स्टेशन पर लाखों की भीड़ उनके अन्तिम दर्शनों के लिए उमड़ पड़ती
थी। कलकत्ता में 4 लाख लोग उनके अन्तिम संस्कार में शामिल हुए।
इन दिनों भगतसिंह अपने किन विचारों के माध्यम से अपनी सारी लड़ाई लड़
रहे थे, इसका स्पष्ट पता उस पत्र में चलता है, जो उन्होंने सुखदेव के साथ चल
रहे विचार-संघर्ष के सन्दर्भ में लिखा था। खेद है कि सुखदेव के जिस पत्र के उत्तर
में भगतसिंह ने यह महत्त्वपूर्ण ख़त लिखा था, वह आज उपलब्ध नहीं है। फिर भी
विचार और बहस के अन्तर्गत आने वाले प्रायः सभी बिन्दु यहाँ स्पष्ट हैं। – स.
कष्टों से भागना कायरता है
प्रिय भाई,
मैंने आपके पत्र को कई बार ध्यानपूर्वक पढ़ा। मैं अनुभव करता हूँ कि बदली
हुई परिस्थितियों ने हम पर अलग-अलग प्रभाव डाला है। जिन बातों से जेल के
बाहर घृणा करते थे, वे आपके लिए अब अनिवार्य हो चुकी हैं। इसी प्रकार मैं जेल
से बाहर जिन बातों का विशेष रूप से समर्थन करता था, वे अब मेरे लिए विशेष
महत्त्व नहीं रखतीं। उदाहरणार्थ, मैं व्यक्तिगत प्रेम को विशेष रूप से मानने वाला
था, परन्तु अब इस भावना का मेरे हृदय एवं मस्तिष्क में कोई विशेष स्थान नहीं
रहा। बाहर आप इसके कड़े विरोधी थे, परन्तु इस सम्बन्ध में अब आपके विचारों
में भारी परिवर्तन एवं क्रान्ति आ चुकी है। आप इसे मानव-जीवन का एक अत्यन्त
आवश्यक एवं अनिवार्य अंग अनुभव करते हैं और अनुभूति से आपको एक प्रकार
का आनन्द भी प्राप्त हुआ है।
जेल की सलाख़ों के पीछे से / 401