भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 313, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रिय लाला लाजपत राय जी,
असेम्बली चुनाव के दिनों जब जनसभाएँ की जाती थीं, तब आपने एक बार
दस हज़ार हिन्दुओं की सभा के समक्ष अपने बारे में सिपाही होने की घोषणा की
थी।
इसके उत्तर में कि आप एक मर चुके नेता हैं, आपने कहा था कि बेशक
हिन्दुओं के हाथों से एक नेता निकल रहा है, लेकिन नेता की जगह उन्हें एक
सिपाही मिल गया है। आपकी घोषणा सुनकर हमें भी बहुत प्रसन्नता हुई, क्योंकि
हम भी ऐसे नेताओं से जोकि राजनीतिक समस्याओं के सम्बन्ध में तो बहुत
लम्बी-चौड़ी बातें किया करते थे, तंग आये हुए थे। पिछले भले दिनों में आप
तर्कशील भाषणों में यह कहते नहीं थकते थे कि “मैं या तख़्त लूँगा या तख़्ता।”
लाहौर के 16 युवकों ने जो घोषणा ‘पंजाब के नौजवानों से अपील’ शीर्षक के
अन्तर्गत की थी, उसके उत्तर में आपने उन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने
आप पर एक धब्बा लगाकर आपको इस राजनीतिक क्षेत्र से निकालने की
कोशिश की है।
यह आरोप देखने से ही कड़वा लगता था। हम आपको फिर मैदान-ए-जंग में
लाना चाहते हैं और आप में यह शतरंजी चालें खेलने की जो चाह पैदा हो गयी है
उसे ख़त्म करना चाहते हैं। आपने कहा था कि ये तो बोल्शेविक हैं इसलिए अपना
नेता लेनिन को मानते हैं। बोल्शेविक होना कोई गुनाह नहीं है और आज हिन्दुस्तान को
लेनिन की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। क्या आपने उन नौजवानों को सी.आई.डी. की
‘मेहरबान’ नज़रों में लाने का कमीना प्रयत्न नहीं किया? आपकी इस बुरी इच्छा को
फल लग गया है, इसलिए आप स्वयं को इस सफलता की बधाई दे सकते हैं। आपने
लंगे मण्डी में इन नौजवानों पर मात्र इसलिए कीचड़ उछाला क्योंकि उन्होंने जनता को
वास्तविक स्थितियों से परिचित कराने का साहस दिखाया। आपकी चुनाव सम्बन्धी
लड़ाई का यह आरम्भिक दिन था। मदनमोहन मालवीय जी को इसका शुभारम्भ करने
के लिए आमन्त्रित किया गया था। आपको संक्षिप्त-सा अध्यक्षीय भाषण करना था,
लेकिन आप अपना संयम खो बैठे। पण्डित मालवीय को लम्बा भाषण करने का समय
ही न मिला, जिसकी कि वह तैयारी करके आये थे। आपने दो घण्टे, बल्कि इससे
भी अधिक ‘पंजाब के नौजवानों से अपील’ कर कड़कती आवाज़ में (उनका) विरोध
किया। आपने इन नौजवानों को दिल खोलकर कोसा और आरोप लगाये। आपने सारे
भाषण में ही तर्कशीलता को बिल्कुल दरकिनार कर दिया। हम आप पर निम्नलिखित
आरोप लगाते हैं –
- राजनीतिक ढुलमुलपन।
- राष्ट्रीय शिक्षा के साथ विश्वासघात।
- स्वराज्य पार्टी के साथ विश्वासघात।
नौजवान भारत सभा और राष्ट्रीय नेतृत्व का मूल्यांकन / 307