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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 312, कुल 788 में से

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पृष्ठ 312

लाला लाजपत राय के नाम खुला ख़त
लाला लाजपत राय को देश के बुजुर्ग नेता मानते हुए भी क्रान्तिकारी उनके
विचारों से असहमत थे। लाला जी और भगतसिंह व उनके साथियों के बीच बहस
में जो तर्क प्रस्तुत किये गये, उसका परिचय देने के लिए ‘किरती’ पत्रिका से कुछ
लेख यहाँ दिये जा रहे हैं।
नवम्बर, 1927 में लाला जी के नाम एक खुला पत्र छापा गया। जनवरी, 1928
में ‘लाला लाजपत राय और कुमारी एग्निस स्मेडली’ शीर्षक से दूसरा लेख छपा।
एग्निस स्मेडली यूरोप की प्रसिद्ध लेखिका थीं, जिनकी भारत व चीन के
स्वतन्त्रता-आन्दोलन में गहरी दिलचस्पी थी। लाला जी ने अपने अख़बार में मिस
स्मेडली की पुस्तक से कुछ अंश छापकर उनका छपना बन्द कर दिया। उसी सन्दर्भ
में यह लेख है। तीसरा लेख अगस्त, 1928 में ‘लाला लाजपत राय और नौजवान
आन्दोलन’ शीर्षक से छपा। – स.
‘किरती’ की सम्पादकीय टिप्पणी
(जिन सज्जनों को लाला लाजपत राय से राजनीतिक जीवन में अच्छी तरह वास्ता
पड़ा है, वे लाला जी की नेतागिरी की कोरी इच्छा और देश के लिए सिवाय टर्र-टर्र
करने तथा और कुछ न करने को अच्छी तरह जानते हैं। विदेशों में बसे भाइयों,
विशेषतः अमेरिका व कनाडा निवासी सिखों का विश्वास 1914 में ही लाला जी
से उठ गया था, जब आप कनाडा-अमेरिका गये थे और आपको उन हिन्दुस्तानी
भाइयों ने अपने गाढ़े पसीने की कमाई का काफ़ी रुपया हिन्दुस्तान में आज़ादी के
लक्ष्य के लिए दिया था और उन भाइयों के अनुसार लाला जी ने वह रुपया अपनी
मर्ज़ी से ख़र्च किया था और बहुत-सा रुपया स्वयं ही हड़प गये थे।
लाला जी की आजकल की मनमरजी और टेढ़ी चालों से हिन्दुस्तान के लोगों
व राजनीतिक क्षेत्रों में उनका विश्वास उठ गया है। हमारे पास 22 सज्जनों की ओर
से छपा ‘लाला जी के नाम ख़त’ प्रकाशित होने के लिए आया है, जिसका अनुवाद
प्रस्तुत है। – सम्पादक, ‘किरती’)
लाहौर, 18 सितम्बर, 1927
306 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़