भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 248, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंरखने पर दुत्कारना शुरू कर देते हैं और उन बेचारे देशभक्तों पर कहर बरपा करते
हैं और कोई परवाह नहीं करते। 1914-15 के मुक़दमों में जो अन्धेरगर्दी हुई, क्या
वे साथी अपनी ही लापरवाही का परिणाम नहीं थे? तब गला फाड़-फाड़कर
काँव-काँव। ये बड़े ख़तरनाक हैं, खूँखार हैं। और जब उन बेचारों का फाँसी लग
जाना, तब भीतर घुस-घुस बातें करना। वे सच्चे देशभक्त थे। 1908 से लोग फाँसी
पर चढ़ते रहे, पर सब अक्लमन्द लोग उन्हें गालियाँ देते रहे। 1925 में विपिनचन्द्र
पाल ने एक लेख लिखा कि It were political assasins who passed their way
to Minto Morely scheme. यानी राजनीतिक हत्यारों की कृपा से ही मिण्टो-मारले
स्कीम मिली थी। और आज काकोरी वाले शहीदों के घरवालों से सहानुभूति प्रकट
करने पर बिगड़ जाने वाला Modern Review भी विपिनचन्द्र पाल की उपरोक्त बात
की ताईद करता हुआ एक बड़े माडरेट एस.आर. दास के एक पत्र में लिखता है
कि इंगलिस्तान को जगाने के लिए और यह बताने के लिए कि हिन्दुस्तान की
स्थिति अच्छी नहीं है, एक बम की ज़रूरत थी – 'A bomb was necessary to
awaken England from Iber sweet dream that all was well with India.'
यदि उन ग़रीबों की ओर, जोकि शान्ति में विश्वास नहीं करते, लेकिन आज़ादी
के लिए हम लोगों से अधिक बलिदान कर सकते हैं, समय पर ध्यान दिया जाये
तो कम से कम उनके साथ अन्धेरगर्दी और जुल्म तो न हुआ करें और उनकी
मुसीबत में कुछ तो कमी हो जाया करे।
एक और भी बात है कि माडरेटों को सदस्य बनाने के लिए खद्दर की शर्त
लगाने पर ज़ोर देने वाले सज्जन यह तो बतायें कि क्या माडरेटों से अधिक बलिदान
करने वाले नौजवानों के लिए कांग्रेस का दर खोलना पाप है? उनको आगे नहीं आने
देना? यह तो हम जानते हैं कि आज़ादी की जंग में इस्तेमाल के लिए हमारे पास
केवल एक ही हथियार है 'सिविल नाफ़रमानी' और वैसा आन्दोलन अधिक
शान्तिपूर्ण होगा ही, लेकिन 'सम्भव' शब्द के आ जाने से किसी को भी कोई
शिकायत नहीं रह जानी चाहिए।
और यदि शब्द कहने से डरते हो कि सरकार आ गला पकड़ेगी तो सुन लो
– "Freedom has to be won inch by inch and whether peaceful or other
methods are employed, the Government of the day will not spare any pains
to crush the movement of independence." यानी सरकार तो शान्तिपूर्ण या
अशान्तिपूर्ण, सभी आन्दोलनों को दबाने की कोशिश करेगी। इसलिए हमें उस
प्रस्ताव से डरना नहीं चाहिए जिसने हमारे काम के दायरे को ज़्यादा खुला कर दिया
और हमारी तंगनज़र को खोल दिया है, बल्कि उसका तो स्वागत करना चाहिए।
किरती/मई, 1928
242 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़