भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 100, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ें75 दिन अनशन करके स्वर्गधाम को सिधारने वाला वीर मैकस्वेनी इस मार्ग
का पथिक होने का श्रेय प्राप्त कर सकता है जो कहता था – "It is the love of
the country that inspires us and not the hate of the enemy and the desire
for full satisfaction for the past."
विश्वप्रेम की देवी का उपासक था ‘गीता रहस्य’ का लेखक पूज्य लोकमान्य
तिलक। और देखोगे? वह सूखा सुकड़ा-सा ‘लँगोटबन्द’ जो सज़ा का हुक्म सुनाये
जाने पर स्वर्गीय हँसी के साथ कह सकता था – मुझे जो दण्ड दिया गया वह
अत्यन्त हलका है और मेरे साथ जैसा विनम्र व्यवहार किया गया है उससे अधिक
की आशा मैं नहीं कर सकता था, जिसके मर्मस्पर्शी कथन का तुम्हारे पत्थर के
हृदयों पर कुछ प्रभाव नहीं होना – महात्मा है इस सिद्धान्त का पक्षपाती।
अरे! रावण और बाली को मार गिराने वाले रामचन्द्र ने अपने विश्वप्रेम का
परिचय दिया था भीलनी के जूठे-कूठे बेरों को खाकर। चचेरे भाइयों में घोर युद्ध
करवा देने वाले, संसार से अन्याय को सर्वथा उठा देने वाले कृष्ण ने परिचय दिया
अपने विश्वप्रेम का – सुदामा के कच्चे चावलों को फाँक जाने में।
तुम भी विश्वप्रेम का दम भरते हो! पहिले पैरों पर खड़ा होना सीखो। स्वतन्त्र
जातियों में अभिमान के साथ सिर ऊँचा करके खड़े होने के योग्य बनो। जब तक
तुम्हारे साथ कामागाटामारू जहाज़ जैसे दुर्व्यवहार होते रहेंगे, जब तक डैम काला
मैन कहलाओगे, जब तक तुम्हारे देश में जलियाँवाले बाग़ जैसे भीषण हत्याकाण्ड
होते रहेंगे, जब तक वीराँगनाओं का अपमान होगा और तुम्हारी ओर से कोई प्रतिकार
न होगा; तब तक तुम्हारा यह ढोंग कुछ मानी नहीं रखता। कैसी शान्ति, कैसा सुख
और कैसा विश्वप्रेम?
यदि वास्तव में चाहते हो कि संसारव्यापी सुख-शान्ति और विश्वप्रेम का प्रचार
करो तो पहिले अपमानों का प्रतिकार करना सीखो। माँ के बन्धन काटने के लिए
कट मरो। बन्दी माँ को स्वतन्त्र करने के लिए आजन्म कालेपानी में ठोकरें खाने
को तैयार हो जाओ। सिसकती माँ को जीवित रखने के लिए मरने को तत्पर हो
जाओ। तब हमारा देश स्वतन्त्र होगा। हम बलवान होंगे। हम छाती ठोंककर विश्वप्रेम
का प्रचार कर सकेंगे। संसार को शान्ति-पथ पर चलने को बाध्य कर सकेंगे।
94 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़