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सर्वकोश
आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Atmatattvaviveka of Udayanacharya

आचार्य उदयन (व्याख्याकार: पं. केदारनाथ त्रिपाठी) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 469, कुल 530 में से

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पृष्ठ 469

ऽभावत्वात् अतदाक्षेपकत्वाच्च । न हि मातृत्वस्य वन्ध्यात्ववत्
नित्यत्वस्याभावो ज्ञानत्वम्, अचेतनानामपि चेतनत्वप्रसङ्गात् ।
नापि नित्यत्वं ज्ञानत्वाभावमाक्षिपेत्, ज्ञानत्वेनाविरोधात्,
विरोधमूलस्य विपक्षे बाधकस्याभावात्, दर्शनादर्शनयोश्चार्थप्रव-
भावरूप है और न तो नित्यत्वाभावका आक्षेपक (उपस्थापक) है।
ऐसे ही नित्यत्व भी न तो ज्ञानत्वाभावरूप है और न तो ज्ञानत्वाभावका
आक्षेपक ही है। क्योंकि जिस प्रकार मातृत्व वन्ध्यात्वका अभावरूप
है, उस प्रकार ज्ञानत्व नित्यत्वका अभावरूप नहीं है। क्योंकि यदि वैसा
हो तो अचेतन वस्तु भी यदि अनित्य हो जैसे घटपटादि, तो उसमें
चेतनत्व (ज्ञानाधिकरणत्व) का प्रसङ्ग हो जायगा। क्योंकि चेतन
होनेके लिये अपेक्षित जो नित्यत्वाभाव, वह उसमें है।
एवं, नित्यत्व ज्ञानत्वाभावको या ज्ञानत्व नित्यत्वाभावको आक्षिप्त
भी नहीं कर सकता। क्योंकि न तो नित्यत्वको ज्ञानत्वके साथ विरोध
है और न ज्ञानत्वको नित्यत्वके साथ। कारण, विरोधका मूल है विपक्ष-
में बाधक होना, जिसका यहाँ अभाव है। अर्थात् "ज्ञान अनित्य ही
होता है, यह तुम्हारा पक्ष है। किन्तु "नित्य भी हो और ज्ञान भी हो"
इस विपक्षमें कोई बाधक नहीं होनेसे ज्ञानत्व और नित्यत्वमें कोई
विरोध नहीं है।
यह कहना कि—जो जो ज्ञान होता है, वह सब अनित्य ही देखा
जाता है तथा जो नित्य आकाशादि है, वह ज्ञानात्मक भी नहीं देखा
जाता, इसलिये ज्ञान होना और नित्य होना परस्पर विरोधी है—तो
इसप्रकारका दर्शन और अदर्शन अर्थप्रवणत्व और अर्थाप्रवणत्वरूप
उपाधिसे प्रयुक्त है। अर्थात् नित्य हो या अनित्य हो, जो सीधे अर्थ
(विषय) से सम्बद्ध है वह ज्ञान है, और जो सीधे विषयसे सम्बद्ध
नहीं है, वह ज्ञान नहीं है, जैसे इच्छा आदि। क्योंकि इच्छा
सीधे विषयसे सम्बद्ध न होकर ज्ञानके माध्यमसे ही विषयसम्बद्ध
होती है। इसीलिये यद्विषयक ज्ञान होता है, तद्विषयक ही इच्छा
होती है।
उक्त उपाधि उसी प्रकार है, जैसे रूपत्व और अनित्यत्वके सम्बन्ध-