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सर्वकोश
आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Atmatattvaviveka of Udayanacharya

आचार्य उदयन (व्याख्याकार: पं. केदारनाथ त्रिपाठी) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

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पृष्ठ 365

३१६ आत्मतत्त्वविवेके
मात्र¹विप्लवो भवेत् । तथा च न्यायरुचिः प्रेक्षावान् न
तत्त्वमधिगच्छेदिति भियेति ॥
॥ इति बाह्यार्थभङ्गवादः ॥
जायगा और मननका आधारभूत प्रमाणमात्र ही विलुप्त हो जायगा ।
तथा श्रवणके बाद मनन करनेकी इच्छावाले बुद्धिमान् जन तत्त्वज्ञानको
नहीं प्राप्त कर सकेंगे ।
। इति बाह्यार्थभङ्गवादनिरास ।
१ 'न्यायमार्गविप्लवो इति १ पु० पा०