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सर्वकोश
आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Atmatattvaviveka of Udayanacharya

आचार्य उदयन (व्याख्याकार: पं. केदारनाथ त्रिपाठी) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 179, कुल 530 में से

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पृष्ठ 179

१२० आत्मतत्त्वविवेके

न चेह तथा । यथा हि प्रत्यक्षे चेतसि देशकालावस्था-
नियतानि परिस्फुटरूपाणि स्वलक्षणानि प्रतिभान्ति, न तथा
शब्दे ( शाब्दे ) लैङ्गिकविकल्पेऽपि । तत्र हि विजातीयव्या-
वृत्तमिव परस्पराकारसङ्कीर्णमिवास्फुटमिव प्रत्यक्षापरिचितं
किञ्चिद्रूपमाभासमानमनुभवविषयः ।
न चोपायभेदमात्रेण प्रतिभासभेद उपपद्यते । न हि
प्रतिपत्त्युपायाः प्रतिपत्त्याकारं परिवर्तयितुमीशते । न चैकं
वस्तु द्वयाकारमिति प्रतिबन्धसिद्धिः । अस्य प्रयोगः-योऽयं

और दायीं आँखोंसे देखनेपर बायीं आँखसे हुआ ज्ञान दायीं आँखसे
हुए ज्ञानसे भिन्न नहीं होता ।
किन्तु, यहाँ ऐसी बात नहीं है । क्योंकि, जैसे प्रत्यक्षदशामें किसी
खास देशकाल और अवस्थाके साथ एवं काला उजला आदि अपने स्पष्ट
रूपके साथ वस्तुओंकी प्रतीति होती है, वैसे शब्द या अनुमानद्वारा
हुए ज्ञानमें नहीं होती । वहाँ ( शब्द और अनुमान स्थलमें ) तो अपने
विजातीयोंसे स्पष्टरूपमे भिन्नताका अनुभव न होनेके कारण भिन्न जैसा,
तथा अपने अन्य सजातीयोंके साथ भेदकी प्रतीति न होनेसे सजातीयोंके
आकारमे मिला जुला जैसा, एव अपने विशेषधर्मकी प्रतीति न होनेके
कारण अस्पष्ट जैसा, प्रत्यक्षसे अपरिचित कोई पदार्थ भासित होता हुआ
अनुभवका विषय होता है ।
जबतक वस्तु भिन्न भिन्न न हो तब तक केवल इन्द्रिय, अनुमान
या शब्दरूप उपायोंके भेदसे ज्ञान भिन्न हो जाय ऐसी बात नहीं हो
सकती । क्योंकि ज्ञानके उपाय ज्ञानके आकारको नहीं बदल सकते
हैं । और यह भी नहीं हो सकता कि एक ही वस्तु दो आकारकी
हो । अर्थात् प्रत्यक्षज्ञान वस्तुकी सत्तामे ही होता है, किन्तु अनुमिति
और शाब्दज्ञान प्रत्यक्षके समान नहीं है, इसलिये वे ( अनुमिति
और शाब्दज्ञान ) वस्तुके रहने या न रहने दोनों दशाओंमें होते
हैं । अतः हमारी पूर्वोक्त व्याप्ति ( नियम ) सिद्ध है कि 'जो ज्ञान
जिस वस्तुके रहने या न रहने दोनों दशाओंमे हो, वह उससे अन्यकी
व्यावृत्ति ( अन्यापोह ) बोधित कराता है" । यहाँ हमारे अनुमानका